नई दिल्ली, 06 अगस्त।
संसद के मानसून सत्र के 14वें दिन राज्यसभा की कार्यवाही गुरुवार को विपक्ष के हंगामे और नारेबाजी के चलते कई बार बाधित हुई। लगातार जारी गतिरोध के बाद सभापति ने सदन की कार्यवाही दोपहर 2.15 बजे तक के लिए स्थगित कर दी।
कार्यवाही शुरू होने पर आवश्यक दस्तावेज सदन के पटल पर रखे गए। इसके बाद विपक्षी सांसदों ने राम मंदिर चढ़ावा चोरी और अन्य मुद्दों को लेकर विरोध दर्ज कराया। हंगामे के बीच के लक्ष्मण, राघव चड्ढा सहित कुछ सदस्यों ने जनहित से जुड़े विषय भी उठाए।
इस दौरान किरेन रिजिजू ने विपक्ष, खासकर नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे पर संसदीय नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि राज्यसभा के नियमों के अनुसार किसी सदस्य के बोलते समय बीच में व्यवधान डालना, शोर-शराबा करना या लगातार टोका-टोकी करना संसदीय परंपराओं के विपरीत है।
रिजिजू ने कहा कि सदन की कार्यवाही निर्धारित नियमों के तहत संचालित होनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि किसी विषय को लगातार दोहराना संसदीय परंपराओं के अनुरूप नहीं है। नियमों के अनुसार लगातार अप्रासंगिक या दोहराव वाली बातें होने पर सभापति पहले सदस्य को सचेत कर सकते हैं और आवश्यकता पड़ने पर उनका भाषण भी रुकवा सकते हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि मल्लिकार्जुन खरगे प्रतिदिन एक ही विषय को दोहराते हैं। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि उन्हें पहले संसदीय नियमों का अध्ययन करना चाहिए और सदन में आचरण संबंधी नियमों का पालन करना चाहिए।
रिजिजू के वक्तव्य के दौरान विपक्षी सदस्य लगातार नारेबाजी करते रहे। इसके बाद जैसे ही खरगे अपनी बात रखने के लिए खड़े हुए, सत्ता पक्ष और विपक्ष के सदस्य एक साथ बोलने लगे, जिससे सदन में शोर-शराबा बढ़ गया। हालात को देखते हुए सभापति सीपी राधाकृष्णन ने कार्यवाही पहले दोपहर 12 बजे तक स्थगित कर दी।
कार्यवाही दोबारा शुरू होने पर खरगे ने पवन खेड़ा को लेकर रिजिजू की टिप्पणी पर सवाल उठाए। जवाब में रिजिजू ने कहा कि उन्होंने दो संसदीय नियमों का उल्लेख किया, लेकिन विपक्ष ने अपनी बहस के समर्थन में कोई नियम नहीं बताया। चर्चा के दौरान सभापति ने रिजिजू से विपक्ष की मांग के संबंध में गृह मंत्री को अवगत कराने को कहा। इसके बावजूद हंगामा जारी रहने पर राज्यसभा की कार्यवाही दोपहर 2.15 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई।














