जूनपुट, 15 सितंबर।
पश्चिम बंगाल के पूर्व मेदिनीपुर जिले के तटीय क्षेत्र जूनपुट में रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) की नई हथियार और मिसाइल परीक्षण सुविधा स्थापित करने का रास्ता साफ हो गया है। राज्य सरकार ने 11 सितंबर को डीआरडीओ के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी।
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने इस परियोजना को पश्चिम बंगाल के विकास और देश की रक्षा क्षमता को मजबूत करने वाली अहम पहल बताया है। रक्षा क्षेत्र के विशेषज्ञ भी इसे राज्य के लिए महत्वपूर्ण कदम मान रहे हैं।
हालांकि, परियोजना के निर्माण और संचालन की समयसीमा तथा यहां किन हथियार प्रणालियों का परीक्षण होगा, इसकी विस्तृत आधिकारिक जानकारी अभी सामने नहीं आई है। मंजूरी के बाद अब परियोजना को जमीन पर उतारने की प्रक्रिया शुरू होगी।
डीआरडीओ ने अप्रैल 2024 में ओडिशा के चांदीपुर स्थित इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज (आईटीआर) के अतिरिक्त पूर्व मेदिनीपुर के तट पर परीक्षण सुविधा बनाने का प्रस्ताव रखा था। यह प्रस्ताव लंबे समय तक प्रशासनिक स्तर पर आगे नहीं बढ़ सका।
वर्तमान सरकार की मंजूरी के बाद अब परियोजना के आगे बढ़ने की उम्मीद है। मुख्यमंत्री ने दावा किया है कि पहले डीआरडीओ के प्रस्ताव पर जरूरी कार्रवाई नहीं हुई थी, लेकिन अब राज्य सरकार ने इसे स्वीकृति दे दी है।
जूनपुट में प्रस्तावित सुविधा के लिए करीब 8.73 एकड़ जमीन का उल्लेख किया गया है। बंगाल की खाड़ी के किनारे स्थित होने के कारण इस स्थान को परीक्षण गतिविधियों के लिहाज से रणनीतिक महत्व का माना जा रहा है। जूनपुट चांदीपुर से लगभग 70 किलोमीटर दूर है।
नई सुविधा का एक उद्देश्य चांदीपुर स्थित मौजूदा परीक्षण ढांचे पर बढ़ते दबाव को कम करना भी है। इसके बनने के बाद परीक्षण गतिविधियों का कुछ हिस्सा जूनपुट में किया जा सकेगा और देश की कुल परीक्षण क्षमता बढ़ाने में मदद मिलेगी।
ओडिशा के चांदीपुर क्षेत्र में डीआरडीओ की इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज देश की प्रमुख मिसाइल परीक्षण सुविधाओं में शामिल है। यह दो लॉन्च कॉम्प्लेक्स के जरिए संचालित होती है। जूनपुट सुविधा बनने के बाद पूर्वी तट पर रक्षा परीक्षण के लिए एक और महत्वपूर्ण केंद्र उपलब्ध होगा।
परियोजना को मंजूरी मिलने के बाद राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। भाजपा ने आरोप लगाया है कि पिछली तृणमूल कांग्रेस सरकार के समय डीआरडीओ के प्रस्ताव पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया और जमीन उपलब्ध कराने में देरी हुई।
वर्तमान सरकार का कहना है कि परियोजना को मंजूरी देकर उसने रक्षा क्षेत्र से जुड़े महत्वपूर्ण निवेश का रास्ता खोला है। सरकार इसे पश्चिम बंगाल में औद्योगिक विकास, तकनीकी गतिविधियों और रोजगार के अवसरों से भी जोड़कर देख रही है।
जूनपुट में रक्षा अनुसंधान से जुड़ी इस परियोजना से आसपास के क्षेत्र में बुनियादी ढांचे और संबंधित आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। तटीय क्षेत्र होने के कारण स्थानीय मछुआरा समुदाय, समुद्री गतिविधियों, सुरक्षा व्यवस्था और पर्यावरण से जुड़े पहलुओं का प्रबंधन भी महत्वपूर्ण रहेगा।
परीक्षण गतिविधियों के दौरान सुरक्षा प्रोटोकॉल और स्थानीय लोगों के लिए जरूरी व्यवस्थाएं परियोजना का अहम हिस्सा होंगी। अतिरिक्त परीक्षण क्षमता मिलने से डीआरडीओ को रक्षा अनुसंधान और विकास कार्यक्रमों के परीक्षण के लिए एक और महत्वपूर्ण तटीय सुविधा मिलेगी।
इससे परीक्षण के लिए उपलब्ध बुनियादी ढांचा बढ़ेगा और चांदीपुर पर निर्भरता कुछ हद तक कम करने में मदद मिल सकती है।
















