नई दिल्ली, 15 सितंबर।
भारत में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के शोध को बाजार और समाज तक पहुंचाने की दिशा में आईआईटी मद्रास ने नई पहल शुरू की है। वाधवानी स्कूल ऑफ डेटा साइंस एंड एआई ने शोध आधारित कृत्रिम बुद्धिमत्ता, मशीन लर्निंग और डेटा साइंस कंपनियां तैयार करने के लिए एआई वेंचर स्टूडियो शुरू करने की घोषणा की है।
इस पहल में स्वास्थ्य एआई, शिक्षा एआई, जिम्मेदार एआई और भारतीय भाषा एआई को प्राथमिकता दी जाएगी। इसका लक्ष्य प्रयोगशालाओं में विकसित शोध को ऐसी कंपनियों में बदलना है, जो वास्तविक समस्याओं का समाधान कर सकें और बड़े स्तर पर विस्तार कर सकें।
एआई स्टूडियो शोधकर्ताओं और संस्थापकों को अपने विचारों को शुरुआती चरण से व्यवहार्य कारोबार में बदलने में सहायता देगा। चयनित उद्यमों को शुरुआती वित्तपोषण, क्लाउड और कंप्यूटिंग सुविधा, अनुसंधान प्रयोगशालाओं तक पहुंच, विशेषज्ञ मार्गदर्शन, उद्यमी इन रेजिडेंस तथा उत्पाद और बाजार अनुकूलता से जुड़ी सहायता मिलेगी।
इस व्यवस्था में शोध विचार को अवधारणा से स्वतंत्र कंपनी बनने तक आगे बढ़ाने की प्रक्रिया तैयार की जाएगी। शोधकर्ताओं को तकनीकी विकास के बाद बाजार तक पहुंचने के लिए संसाधन, संस्थागत मार्गदर्शन, उद्यमिता प्रशिक्षण और संभावित ग्राहकों तक पहुंच उपलब्ध कराई जाएगी।
चार क्षेत्रों पर विशेष ध्यान
एआई स्टूडियो स्वास्थ्य, शिक्षा, जिम्मेदार एआई और भारतीय भाषाओं से जुड़े क्षेत्रों को प्राथमिकता देगा। इसका उद्देश्य कृत्रिम बुद्धिमत्ता को भारत की सामाजिक, शैक्षणिक, स्वास्थ्य और भाषायी जरूरतों के अनुरूप विकसित करना है। भारतीय भाषाओं पर आधारित तकनीक से देश की बड़ी आबादी तक डिजिटल और एआई सेवाओं की पहुंच बढ़ाने की संभावना है।
वाधवानी स्कूल ऑफ डेटा साइंस एंड एआई के प्रमुख प्रोफेसर बालारमन रविंद्रन ने कहा कि संस्थान का लक्ष्य एआई को प्रयोगशाला से वास्तविक दुनिया तक पहुंचाना है। उनके अनुसार एआई वेंचर स्टूडियो शोध को केवल प्रकाशित करने के बजाय ऐसी कंपनियों के निर्माण पर ध्यान देगा, जो लोगों के जीवन में तकनीक का उपयोग बढ़ाएं।
स्टूडियो की मुख्य कार्यकारी अधिकारी रूपा करेमुंगीकर ने कहा कि विश्वस्तरीय शोध और भारत की एआई महत्वाकांक्षाओं को कंपनियों में बदलने का यह महत्वपूर्ण अवसर है। उन्होंने कहा कि स्टूडियो विश्वसनीय शोध के आधार पर वास्तविक बाजारों की समस्याओं के समाधान वाले उद्यम तैयार करने पर काम करेगा।
आईआईटी मद्रास के स्कूल ऑफ इनोवेशन एंड एंटरप्रेन्योरशिप के प्रमुख प्रोफेसर सत्य शेषाद्री के अनुसार, यह पहल संस्थान के सक्रिय उद्यम निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। चयनित टीमों को विशेषज्ञ मार्गदर्शन, तकनीक, संसाधन और ग्राहकों तक पहुंच उपलब्ध कराई जाएगी।
दो चरणों में होगा चयन
एआई स्टूडियो में प्रवेश के लिए दो चरणों की प्रक्रिया होगी। पहले चरण में प्रशिक्षण और बूटकैंप होगा, जिसमें बड़ी संख्या में आवेदक शामिल हो सकेंगे। इसके बाद चुने गए उद्यमों के सीमित समूह को पूर्ण स्टूडियो कार्यक्रम में प्रवेश मिलेगा।
पहले समूह के लिए आवेदन 3 अक्टूबर 2026 से शुरू होंगे। चयनित उद्यम छह महीने के विकास और मूल्यांकन कार्यक्रम से गुजरेंगे। संस्थागत वित्तपोषण दौर की ओर बढ़ रहे उद्यमों के लिए यह अवधि तीन महीने तक बढ़ाई जा सकती है। स्टूडियो साल में दो समूह संचालित करेगा।
आईआईटी मद्रास के अनुसार, यह पहल उसके पहले से विकसित डीप टेक इनक्यूबेशन तंत्र पर आधारित है। इस तंत्र ने सैकड़ों डीप टेक स्टार्टअप को इनक्यूबेशन में सहायता दी है। इन स्टार्टअप का कुल मूल्य 8 अरब डॉलर है और इनके माध्यम से 11 हजार से अधिक प्रत्यक्ष रोजगार सृजित हुए हैं।
वाधवानी स्कूल ऑफ डेटा साइंस एंड एआई की स्थापना 2024 में हुई थी। यह डेटा साइंस और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के विभिन्न क्षेत्रों में काम करने वाले संकाय सदस्यों को एक साथ लाता है। अब एआई स्टूडियो के जरिए संस्थान अपनी शोध क्षमता को उत्पाद, बाजार, निवेश और रोजगार से जोड़ने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
















