नई दिल्ली, 24 सितंबर।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गुरुवार को अपने साझा किए गए सुभाषित के माध्यम से समाज में शांति और सद्भाव बनाए रखने के लिए वाणी में संयम और अनुशासन के महत्व को बताया।
प्रधानमंत्री ने संस्कृत का श्लोक साझा करते हुए लिखा, “अनुद्वेगकरं वाक्यं सत्यं प्रियहितं च यत्। स्वाध्यायाभ्यसनं चैव वाङ्मयं तप उच्यते॥”
उन्होंने श्लोक का अर्थ बताते हुए कहा कि व्यक्ति को हमेशा ऐसे शब्द बोलने चाहिए जो सत्य, मधुर और हितकारी हों तथा किसी के मन में अशांति पैदा न करें।
प्रधानमंत्री ने कहा कि पवित्र ज्ञान का लगातार अध्ययन और चिंतन वाणी को बेहतर और सार्थक बनाता है। उन्होंने बताया कि सोच-समझकर बोले गए शब्द समाज में शांति, सद्भाव और सकारात्मक वातावरण को बढ़ावा देते हैं।
















