जिनेवा, 24 सितंबर।
भारत ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के सत्र में पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में बिगड़ते हालात और आम नागरिकों की मौत का मुद्दा उठाया। भारत ने पाकिस्तान से अपने लोगों की समस्याओं के समाधान और विकास पर ध्यान देने को कहा।
जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के समक्ष भारतीय राजनयिक क्षितिज त्यागी ने कहा कि पाकिस्तान का मौजूदा तरीका उसकी आर्थिक चुनौतियों को दूर करने में मददगार नहीं होगा। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान को दूसरे के क्षेत्र पर कब्जे और आतंकवाद फैलाने के बजाय विकास पर ध्यान देना चाहिए।
त्यागी ने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर की स्थिति का भी उल्लेख किया। उन्होंने जून से नागरिकों की मौत, इस्लामाबाद और रावलपिंडी में छात्रों की गिरफ्तारी तथा भोजन और दवाओं पर प्रतिबंध लगाए जाने की रिपोर्टों का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि परिषद की जांच के मानदंडों पर पाकिस्तान को ही जवाब देना चाहिए।
भारतीय राजनयिक ने भारत का पक्ष रखते हुए कहा कि देश में दुनिया की सबसे बड़ी मुस्लिम आबादियों में से एक रहती है। उन्होंने कहा कि भारत में अल्पसंख्यक मतदान करते हैं, कानून बनाते हैं, सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीश के रूप में काम करते हैं और विभिन्न संस्थानों का नेतृत्व करते हैं।
त्यागी ने कहा कि दशकों तक सीमापार आतंकवाद को प्रायोजित करने के बाद पाकिस्तान जम्मू-कश्मीर का मुद्दा उठाने की स्थिति में नहीं है। उन्होंने 1990 में कश्मीरी पंडितों के विस्थापन का जिक्र करते हुए कहा कि उन्हें उन आतंकवादियों ने घरों से निकाला था, जिन्हें पाकिस्तान ने हथियार दिए, प्रशिक्षित किया और सीमा पार भेजा था।
उन्होंने कहा कि इन आतंकवादियों ने इसके बाद हर धर्म के कश्मीरियों को निशाना बनाया, जिनमें बड़ी संख्या में मुसलमान भी शामिल थे। त्यागी ने कहा कि जिस देश पर आतंकवादियों को समर्थन देने के आरोप हैं, वह अब परिषद से जांच की मांग कर रहा है।
यह प्रतिक्रिया पाकिस्तान की ओर से परिषद के सत्र में दोबारा कश्मीर का मुद्दा उठाए जाने के बाद आई। भारत ने अपने रुख को दोहराते हुए कहा कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न और अविभाज्य अंग था, है और हमेशा रहेगा।
















