नई दिल्ली, 15 सितंबर।
भारत के प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने न्यायाधीशों के खिलाफ शिकायतों से निपटने के लिए सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट द्वारा विकसित व्यवस्था को मजबूत, बेहद सक्रिय और समय पर कार्रवाई करने वाली बताया है। उन्होंने न्यायपालिका में लगातार सुधार और अधिक पारदर्शिता की जरूरत पर भी जोर दिया।
नई दिल्ली में सोमवार को छठे राम जेठमलानी स्मृति व्याख्यान में मुख्य न्यायाधीश ने यह बात कही। व्याख्यान का विषय न्याय व्यवस्था में पारदर्शिता और जनता के भरोसे से जुड़ा था।
सीजेआई ने कहा कि सुधार को लगातार जारी रहने वाली प्रक्रिया माना जाना चाहिए। कोई भी संस्था केवल इस बात पर गर्व नहीं कर सकती कि उसमें कोई बदलाव नहीं हो रहा है।
उन्होंने कहा कि न्यायपालिका ने खुद आलोचना के महत्व को स्वीकार किया है। सुप्रीम कोर्ट भी यह स्पष्ट कर चुका है कि न्यायपालिका आलोचना से दूर नहीं है और न ही उसे आलोचना से बचना चाहिए।
सूर्यकांत के अनुसार, न्यायिक कामकाज की निष्पक्ष, जानकारी पर आधारित और रचनात्मक समीक्षा जीवंत संवैधानिक लोकतंत्र का जरूरी हिस्सा है। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका की पारदर्शिता के केंद्र में यही सोच होनी चाहिए।
प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि कोई अदालत खुद को जांच और सवालों से ऊपर रखकर जनता का भरोसा कायम नहीं कर सकती। न्याय व्यवस्था को अपनी कार्यप्रणाली की जांच, सवाल और जरूरत पड़ने पर आलोचना के लिए खुला रहना चाहिए।
उन्होंने जनता के भरोसे और जनता की मंजूरी के बीच अंतर भी बताया। उनके अनुसार वास्तविक जनविश्वास तब स्थापित होता है, जब किसी मामले में हारने वाला व्यक्ति भी यह मानता रहे कि उसके साथ न्यायिक प्रक्रिया निष्पक्ष रही।
सीजेआई ने न्यायपालिका में शिकायतों से निपटने की मौजूदा व्यवस्था को मजबूत और समयबद्ध बताते हुए इसे लगातार बेहतर बनाने तथा व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
















