नई दिल्ली, 16 सितंबर।
प्रवर्तन निदेशालय ने पश्चिम बंगाल और मध्य प्रदेश से जुड़े दो अलग-अलग मामलों में कार्रवाई की है। कोलकाता क्षेत्रीय कार्यालय ने अमृत समूह की कंपनियों के निदेशकों और प्रवर्तकों से जुड़े कोलकाता और इंदौर के 17 आवासीय एवं कार्यालय परिसरों में धनशोधन निवारण कानून के तहत तलाशी और जब्ती की कार्रवाई की।
जांच एजेंसी के अनुसार, अमृत समूह की कंपनियों और उनके निदेशकों ने विभिन्न जमा योजनाओं के नाम पर आम लोगों से बड़ी रकम जुटाई थी। निवेशकों को अधिक रिटर्न देने का भरोसा दिया गया, लेकिन कथित तौर पर वादा किया गया रिटर्न वापस नहीं किया गया।
इसी मामले में समूह से जुड़े केसी दुजारी, काली किशोर बागची समेत अन्य निदेशकों और प्रवर्तकों के परिसरों की तलाशी ली गई। यह कार्रवाई कोलकाता और इंदौर में कुल 17 ठिकानों पर हुई।
दूसरे मामले में ईडी ने अमित गांगुली को मंगलवार रात गिरफ्तार किया। यह मामला जमीन हड़पने, दस्तावेजों में जालसाजी, जमीन के अभिलेखों में हेरफेर और पावर ऑफ अटॉर्नी से जुड़ी कथित अनियमितताओं से संबंधित है।
ईडी की जांच के मुताबिक, गांगुली ने अलग-अलग व्यक्तियों और संस्थाओं की संपत्तियों पर कथित तौर पर गैरकानूनी तरीकों से नियंत्रण हासिल किया। जांच एजेंसी के अनुसार, इसके लिए फर्जी बोर्ड प्रस्ताव, जाली हस्ताक्षर वाले बिक्री समझौते, फर्जी दस्तावेज और विलेख तैयार करने जैसे तरीकों का इस्तेमाल किया गया।
जांच में जमीन के अभिलेखों में कथित हेरफेर और झूठे या फर्जी दावों के आधार पर दीवानी मुकदमे दायर करने की बात भी सामने आई है। ईडी ने आरोप लगाया कि संबंधित जमीन मालिकों के वैध अधिकारों को नकारने के साथ अपने अधिकारों के लिए सामने आने वाले लोगों को धमकाने और शारीरिक बल का इस्तेमाल करने के तरीके भी अपनाए गए।
जांच एजेंसी को अमित गांगुली के खिलाफ पश्चिम बंगाल पुलिस में दर्ज 23 प्राथमिकी की जानकारी भी मिली है। ईडी के अनुसार, ये मामले संपत्तियों को कथित धोखाधड़ी और गैरकानूनी तरीकों से हासिल करने तथा उनके लेनदेन से जुड़े हैं।
















