गांधीनगर, 16 सितंबर।
भारत सरकार का मत्स्य पालन विभाग 17 सितंबर को गांधीनगर में गहरे समुद्र में मछली पकड़ने को बढ़ावा देने और ‘एक्सेस पास’ तथा एलओए धारकों के साथ संवाद के लिए एक दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला आयोजित करेगा। कार्यशाला में पारंपरिक और स्थानीय मछुआरों को उच्च मूल्य वाले समुद्री संसाधनों के उपयोग के लिए प्रोत्साहित करने के साथ जमीनी चुनौतियों पर चर्चा होगी।
कार्यक्रम में केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी तथा पंचायती राज मंत्री राजीव रंजन सिंह, गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल और केंद्रीय मत्स्य पालन राज्य मंत्री प्रो. एसपी सिंह बघेल शामिल होंगे। देशभर से महिला मछुआरों समेत मछुआरे, अधिकारी और क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञ भी इसमें भाग लेंगे।
कार्यशाला में गहरे समुद्र में मत्स्य पालन की पूरी मूल्य शृंखला से जुड़े विषयों पर तकनीकी सत्र होंगे। इनमें समुद्री संसाधनों की क्षमता, आधुनिक नौकाओं का उपयोग, कौशल विकास, संस्थागत वित्तपोषण, प्रसंस्करण एवं मूल्यवर्धन और निर्यात बाजारों तक पहुंच जैसे विषय शामिल हैं।
विशेषज्ञ भारत के विशेष आर्थिक क्षेत्र और गहरे समुद्र में आधुनिक तकनीक अपनाने, मछुआरों की क्षमता बढ़ाने तथा सहकारी मॉडल के जरिए निवेश को प्रोत्साहित करने पर विचार-विमर्श करेंगे।
वर्तमान में देश की अधिकांश मछली पकड़ने की गतिविधियां तट से 40 से 50 समुद्री मील के दायरे में केंद्रित हैं। गहरे समुद्री क्षेत्र में टूना जैसी उच्च मूल्य वाली मछली प्रजातियों के दोहन की व्यापक संभावनाएं हैं।
भारत की तटरेखा करीब 11,099 किलोमीटर लंबी है और उसका विशेष आर्थिक क्षेत्र लगभग 24 लाख वर्ग किलोमीटर में फैला है। इस क्षेत्र में करीब 58.6 लाख मीट्रिक टन समुद्री मत्स्य संसाधन की क्षमता आंकी गई है। समुद्री मत्स्य क्षेत्र लगभग 50 लाख मछुआरों की आजीविका का आधार है।
केंद्र सरकार के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में भारत ने करीब 73,890 करोड़ रुपये मूल्य के समुद्री उत्पादों का निर्यात किया। गहरे समुद्र में मत्स्य पालन का विस्तार समुद्री अर्थव्यवस्था को बढ़ाने और मछुआरों की आय बढ़ाने की संभावनाओं से जुड़ा है।
केंद्र सरकार ने विशेष आर्थिक क्षेत्र नियम-2025 और हाई सीज दिशानिर्देश-2025 अधिसूचित किए हैं। इनके तहत तट से 12 से 200 समुद्री मील के बीच मछली पकड़ने के लिए ‘रियलक्राफ्ट’ पोर्टल के जरिए नि:शुल्क डिजिटल ‘एक्सेस पास’ जारी किया जाता है।
मंत्रालय के अनुसार, तटीय राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से मिले आवेदनों के आधार पर अब तक 9,650 एक्सेस पास जारी किए जा चुके हैं। 24 मीटर से अधिक लंबी यंत्रीकृत नौकाओं के लिए यह पास अनिवार्य है।
छोटी और गैर-यंत्रीकृत पारंपरिक नौकाओं को स्थानीय आजीविका की सुरक्षा के उद्देश्य से इस व्यवस्था से पूरी तरह छूट दी गई है।















