नई दिल्ली, 17 सितंबर।
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) से जुड़ा एक अहम मामला अब देश के सर्वोच्च न्यायालय तक जा पहुंचा है। जाने-माने वकील प्रशांत भूषण ने मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अगुवाई वाली पीठ के समक्ष इस मामले का उल्लेख करते हुए गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने अदालत को बताया कि दिल्ली में एसआईआर प्रक्रिया के दौरान पहले ही लगभग 47 लाख मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से बाहर किए जा चुके हैं, और अब निर्वाचन आयोग द्वारा 'तार्किक विसंगति' का हवाला देते हुए करीब 33 लाख लोगों को नोटिस जारी किए गए हैं। प्रशांत भूषण ने इस पूरी प्रक्रिया को पूरी तरह से अस्पष्ट और संदिग्ध करार दिया है।
अदालत में मेंशनिंग के दौरान प्रशांत भूषण ने तर्क दिया कि निर्वाचन आयोग ने आखिरकार किस आधार और मानकों पर मतदाताओं के नाम सूची से हटाए हैं, इसका कोई भी खुलासा जनता के सामने नहीं किया गया है, जबकि नियमों के मुताबिक इसकी पूरी जानकारी आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर होना अनिवार्य है। उन्होंने आगे यह भी आरोप लगाया कि कई नागरिकों को नोटिस मिले हैं तो कई को इसकी भनक तक नहीं है, और भेजे गए नोटिस में भी यह स्पष्ट नहीं किया जा रहा है कि संबंधित व्यक्ति को किस कारण से बुलाया जा रहा है या फिर उनका नाम इस विसंगति की सूची में कैसे आया। सभी पक्षों को सुनने के बाद सर्वोच्च अदालत ने निर्देश दिया है कि इस याचिका पर अब आगामी 21 सितंबर को सुनवाई की जाएगी, जिस दिन एसआईआर से संबंधित अन्य राज्यों के मामले पहले से ही सुनवाई के लिए सूचीबद्ध हैं।















