भागलपुर, 17 सितंबर।
बिहार का भागलपुर जिला इन दिनों बाढ़, कटाव और तटबंधों पर बढ़ते दबाव की चुनौती से जूझ रहा है। गंगा और उसकी सहायक नदियों के बढ़ते जलस्तर ने जिले के कई हिस्सों में चिंता बढ़ा दी है।
सितंबर में कई स्थानों पर तटबंध टूटने से बाढ़ की स्थिति गंभीर हुई है। लगातार सामने आ रही इन घटनाओं ने तट सुरक्षा, बुनियादी ढांचे की मजबूती और आपदा से निपटने की तैयारियों पर सवाल खड़े किए हैं।
भागलपुर की भौगोलिक स्थिति जिले के लिए चुनौती भी बन रही है। 3 मई की रात विक्रमशिला सेतु का करीब 33 मीटर हिस्सा क्षतिग्रस्त होकर गंगा में गिर गया था।
इस घटना के बाद नवगछिया और सीमांचल के क्षेत्रों से संपर्क प्रभावित हुआ। दूध, सब्जी, केला और मछली जैसी रोजमर्रा की आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति भी रुक गई थी।
सरकार ने घटना के बाद जांच और मरम्मत के निर्देश दिए थे। बाढ़ के पानी के कारण काम में देरी हो रही है। मशीनें मौके पर पहुंचने के बाद भी काम शुरू नहीं हो पाया है।
हर साल होने वाली बाढ़ और कटाव को केवल प्राकृतिक आपदा मानने पर भी सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, राघोपुर बांध के आसपास नदी के बढ़ते दबाव को लेकर तकनीकी विशेषज्ञ पहले ही चेतावनी दे चुके थे।
समय पर सुरक्षात्मक कदम नहीं उठाए जाने से दियारा क्षेत्र के कई लोग घर, खेत और आजीविका बचाने की कोशिश कर रहे हैं। बाढ़ के बीच कहलगांव में सार्वजनिक स्थल पर राष्ट्रीय ध्वज क्षतिग्रस्त स्थिति में मिला।
राष्ट्रीय ध्वज की स्थिति को लेकर स्थानीय लोगों ने नाराजगी जताई। उनका कहना है कि राष्ट्रीय ध्वज देश के गौरव और शहीदों के सम्मान का प्रतीक है, इसलिए आपदा के समय भी इसकी देखरेख में लापरवाही नहीं होनी चाहिए।
भागलपुर में हर आपदा के बाद राहत और बचाव व्यवस्था सक्रिय होती है, लेकिन स्थायी समाधान की जरूरत महसूस की जा रही है। केवल सामुदायिक रसोई और नावों के सहारे समस्या का सामना करना पर्याप्त नहीं माना जा रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार, संवेदनशील तटबंधों और कटाव प्रभावित क्षेत्रों का वैज्ञानिक सर्वे कराया जाना चाहिए। पुराने पुलों और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे का नियमित संरचनात्मक परीक्षण भी जरूरी है।
पहले से खतरे की चेतावनी वाले क्षेत्रों में सुरक्षा कार्यों को प्राथमिकता देने की आवश्यकता बताई गई है। चेतावनियों को नजरअंदाज करने पर भविष्य में नुकसान बढ़ने की आशंका जताई गई है।
प्रदेश महामंत्री डॉ. प्रीति शेखर ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के संयुक्त प्रयासों से केंद्रीय टीम ने भागलपुर सहित बिहार के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया है। उन्होंने आने वाले दिनों में बाढ़ से बचाव के लिए ठोस और स्थायी समाधान किए जाने की बात कही।
कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता ज्योति कुमार सिंह ने कहा कि दिल्ली और बिहार में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की सरकार होने के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी दलों और विशेषज्ञों की ओर से बार-बार चेतावनी दिए जाने के बाद भी इस दिशा में स्थायी कदम नहीं उठाए गए।
















