नई दिल्ली, 17 सितंबर।
देश में प्रतिबंधित और संवेदनशील दवाओं की बिक्री पर नकेल कसने के लिए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने एक बड़ा और सख्त कदम उठाया है। इसके तहत अब देश के सभी मेडिकल स्टोरों पर सीसीटीवी कैमरों की निगरानी अनिवार्य करने की योजना बनाई जा रही है, जिसके लिए ‘ड्रग्स रूल्स, 1945’ में संशोधन का प्रस्ताव तैयार किया गया है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा इस सिलसिले में बीते 8 सितंबर 2026 को एक आधिकारिक ड्राफ्ट गजट नोटिफिकेशन जारी किया जा चुका है। इस नए बदलाव का मुख्य मकसद बिना डॉक्टर के वैध नुस्खे (प्रिस्क्रिप्शन) के शेड्यूल एच, एच1 और एक्स श्रेणी की दवाओं की अवैध बिक्री पर पूरी तरह रोक लगाना और पूरी सप्लाई चेन में पारदर्शिता सुनिश्चित करना है।
मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, इन श्रेणियों में एंटीबायोटिक्स, गंभीर मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी साइकोट्रॉपिक दवाएं और नशीले प्रभाव वाले पेनकिलर शामिल हैं, जिनका अनियंत्रित उपयोग जनस्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। इससे पहले इस प्रस्ताव पर ड्रग्स कंसल्टेटिव कमेटी (डीसीसी) और ड्रग्स टेक्निकल एडवाइजरी बोर्ड (डीटीएबी) की बैठकों में गहन विचार-विमर्श किया जा चुका है, जहां से इसे मंजूरी की संस्तुति मिल चुकी है। सरकार का मानना है कि सीसीटीवी फुटेज होने से यह आसानी से ट्रैक किया जा सकेगा कि कौन सी दवा किसे और किस डॉक्टर के पर्चे पर दी गई, जिससे दवाओं के दुरुपयोग पर प्रभावी लगाम लगेगी। फिलहाल इस मसौदे पर दवा व्यापारियों, फार्मासिस्टों और आम जनता से आपत्तियां एवं सुझाव आमंत्रित किए गए हैं।
















