नई दिल्ली, 17 सितंबर।
राष्ट्रीय राजधानी में चर्चित सत्य निकेतन बिल्डिंग हादसे से जुड़े मामले में केंद्र सरकार ने दिल्ली उच्च न्यायालय में एक याचिका का विरोध किया है। दरअसल, इस मामले में पूर्व आईपीएस अधिकारी और पुड्डूचेरी की पूर्व उप-राज्यपाल किरण बेदी को पक्षकार बनाए जाने की मांग वाली याचिका दाखिल की गई थी। इस पर सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश डीके उपाध्याय की अगुवाई वाली बेंच ने टिप्पणी की कि इस दुर्घटना से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं पर विचार करने के दौरान एक प्रशासक के रूप में किरण बेदी का लंबा और अमूल्य अनुभव बेहद उपयोगी साबित हो सकता है।
सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि किरण बेदी देश की एक बेहद जवाबदेह नागरिक हैं और व्यापक जनहित से जुड़े इस प्रकरण में उनके प्रशासनिक ज्ञान का लाभ उठाया जाना चाहिए। कोर्ट ने केंद्र सरकार को सलाह दी कि वे इस विषय को किसी टकराव के दृष्टिकोण से बिल्कुल न देखें। वहीं, केंद्र की ओर से पेश हुए एएसजी चेतन शर्मा ने आपत्तियों का हवाला देते हुए कहा कि वह इस मामले में पहले से पूर्वाग्रह से ग्रसित रही हैं, और इसके साथ ही कोर्ट से जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा। अदालत ने केंद्र सरकार को तीन हफ्ते के भीतर अपना जवाब प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।
गौरतलब है कि इससे पहले दिल्ली उच्च न्यायालय ने सात सितंबर को नगर निगम (MCD) को यह निर्देश दिया था कि वह दक्षिणी दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में इमारत ढहने की इस अचानक हुई घटना की उच्च-स्तरीय जांच सुनिश्चित करे। मुख्य न्यायाधीश की बेंच ने तब दिल्ली सरकार को भी लताड़ लगाते हुए निर्देश दिया था कि मलबे में फंसे छात्रों के बचाव अभियान को तुरंत तेज किया जाए, और इस गंभीर हादसे में राज्य सरकार अपनी जिम्मेदारी से किसी भी सूरत में पीछे नहीं हट सकती।
















