नई दिल्ली, 18 सितंबर।
यूपीआई भुगतान पर नए शुल्क को लेकर केंद्र सरकार और कांग्रेस के बीच राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। नए प्रावधान के तहत 2,000 रुपये से अधिक के चुनिंदा व्यापारी भुगतान पर 0.4 प्रतिशत मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी एमडीआर लागू किया जाएगा। यह व्यवस्था 15 अक्टूबर से प्रभावी होगी।
हालांकि, आम लोगों के बीच सीधे पैसे भेजने या प्राप्त करने वाले यूपीआई भुगतान पर कोई शुल्क नहीं लगाया गया है। 2,000 रुपये तक के व्यापारी भुगतान भी शुल्क से मुक्त रहेंगे। सरकार के अनुसार छोटे दुकानदारों और स्ट्रीट वेंडरों को भी शून्य एमडीआर व्यवस्था में सुरक्षा दी गई है।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि एमडीआर ग्राहक से वसूला जाने वाला शुल्क नहीं है। यह भुगतान व्यवस्था से जुड़े बैंकों, भुगतान सेवा प्रदाताओं और यूपीआई ऐप प्रदाताओं के बीच बांटा जाने वाला शुल्क है। बैंकों को यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं कि व्यापारी इस राशि का बोझ ग्राहकों पर न डालें।
नए नियमों के अनुसार 75,000 रुपये या उससे अधिक के पात्र व्यापारी लेनदेन पर एमडीआर की अधिकतम सीमा 300 रुपये प्रति लेनदेन होगी। जरूरी सेवाओं और कम मार्जिन वाले क्षेत्रों में 2,000 रुपये से अधिक के भुगतान के लिए पांच रुपये का तय शुल्क रखा गया है। पूंजी बाजार से जुड़े भुगतान पर 0.02 प्रतिशत एमडीआर लागू होगा, जिसकी अधिकतम सीमा 300 रुपये होगी।
सरकार का कहना है कि लगभग 96 प्रतिशत व्यापारी यूपीआई लेनदेन इस बदलाव से प्रभावित नहीं होंगे। उसके अनुसार शुल्क केवल चुनिंदा व्यापारी लेनदेन पर लागू होगा और आम लोगों के बीच होने वाले यूपीआई भुगतान पूरी तरह निशुल्क रहेंगे।
कांग्रेस ने इस फैसले का विरोध करते हुए सरकार से नए शुल्क को वापस लेने की मांग की है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने इसे यूपीआई पर कर बताते हुए तत्काल वापस लेने की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने अमेरिका के दबाव में यह फैसला लिया है।
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने भी सरकार के फैसले पर सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि क्या एमडीआर की व्यवस्था अमेरिकी कार्ड कंपनियों को यूपीआई के मुकाबले प्रतिस्पर्धा का अवसर देने के लिए की गई है। कांग्रेस ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार ने पहले यूपीआई पर शुल्क लगाने की संभावना को खारिज किया था और अब अपने रुख में बदलाव किया है।
कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने भी इस फैसले की आलोचना की और इसे नया मोदी कर बताया। विपक्षी दलों की ओर से शुल्क वापस लेने की मांग के बीच सरकार ने फिलहाल फैसले में बदलाव के संकेत नहीं दिए हैं।
केंद्र सरकार ने कांग्रेस के उस आरोप को खारिज किया है जिसमें फैसले को विदेशी दबाव से जोड़ा गया है। वित्त मंत्रालय का कहना है कि यूपीआई से जुड़े नीतिगत फैसले भारत में स्वतंत्र रूप से लिए गए हैं और नए ढांचे का उद्देश्य भुगतान प्रणाली को लंबे समय तक टिकाऊ बनाना, साइबर सुरक्षा मजबूत करना तथा इसके बुनियादी ढांचे के विस्तार के लिए संसाधन उपलब्ध कराना है।
सरकार ने यह भी कहा है कि आम ग्राहक को यूपीआई भुगतान के लिए शुल्क नहीं देना होगा। ग्राहक द्वारा दुकानदार को किए जाने वाले 2,000 रुपये तक के भुगतान भी निशुल्क रहेंगे। छोटे व्यापारियों के लिए तय सीमा तक शून्य एमडीआर की व्यवस्था जारी रहेगी।
इस फैसले पर कारोबारियों की ओर से भी चिंता जताई गई है। कुछ व्यापारिक संगठनों ने आशंका व्यक्त की है कि अतिरिक्त लागत का असर छोटे मार्जिन वाले कारोबारों पर पड़ सकता है और कुछ व्यापारी नकद भुगतान को प्राथमिकता दे सकते हैं। इस मुद्दे को लेकर सर्वोच्च न्यायालय में भी एक याचिका दायर की गई है।
इस तरह यूपीआई शुल्क को लेकर विवाद दो प्रमुख मुद्दों पर केंद्रित है। सरकार इसे यूपीआई व्यवस्था को आर्थिक रूप से टिकाऊ बनाने की व्यवस्था बता रही है, वहीं कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल इसे वापस लेने की मांग कर रहे हैं और इसके पीछे विदेशी दबाव होने का आरोप लगा रहे हैं। सरकार ने इन आरोपों से इनकार किया है।
















