नई दिल्ली, 17 सितंबर।
भारत ने पाकिस्तान और चीन के बीच हालिया संयुक्त सीमा आयोग के गठन के कदम पर कड़ी आपत्ति जताते हुए इसे सिरे से खारिज कर दिया है। विदेश मंत्रालय ने दो टूक शब्दों में कहा है कि पाकिस्तान के पास इस तरह के किसी भी समझौते में शामिल होने का कोई अधिकार या कानूनी आधार नहीं है, क्योंकि वह भारतीय भूभाग के एक हिस्से पर अवैध और जबरन कब्जा जमाए बैठा है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए स्पष्ट किया कि भारत का रुख इस मामले में हमेशा से बेहद साफ और अडिग रहा है। सरकार का यह मानना है कि पाकिस्तान के साथ कोई अंतरराष्ट्रीय सीमा इस रूप में वैध नहीं है, और इस तथाकथित पाकिस्तान-चीन सीमा संयुक्त आयोग का कोई कानूनी औचित्य नहीं है।
प्रवक्ता ने इस बात को फिर से दोहराया कि केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर तथा लद्दाख हमेशा से देश के अभिन्न और अविभाज्य अंग रहे हैं, हैं और आगे भी रहेंगे। भारत ने कभी भी वर्ष 1963 के उस तथाकथित चीन-पाकिस्तान सीमा समझौते को स्वीकार नहीं किया है, और देश लगातार यह मानता आया है कि वह पूरी तरह से गैरकानूनी और अमान्य है। नई दिल्ली ने पड़ोसी देश को दो टूक चेतावनी देते हुए कहा है कि इस तरह के दिखावेबाजी वाले हथकंडे अपनाने के बजाय उसे फौरन उन सभी क्षेत्रों को खाली कर देना चाहिए जिन पर उसने जबरन और अवैध कब्जा कर रखा है।
















