भोपाल, 18 सितंबर।
मध्य प्रदेश में पिछले 24 वर्षों के दौरान उच्च शिक्षा के क्षेत्र में संस्थानों और विद्यार्थियों की संख्या में बड़ा विस्तार हुआ है। वर्ष 2002 में प्रदेश में 13 विश्वविद्यालय थे, जिनकी संख्या वर्ष 2026 में बढ़कर 81 हो गई है। इसी अवधि में शासकीय महाविद्यालयों की संख्या 299 से बढ़कर 571 हो गई। महाविद्यालयों में विद्यार्थियों के प्रवेश में भी करीब 4.9 गुना वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 2002 में 2 लाख 46 हजार 634 विद्यार्थियों ने प्रवेश लिया था, जो वर्तमान वर्ष में 9 लाख 64 हजार तक पहुंच गया है।
वर्ष 2002 में प्रदेश के 13 विश्वविद्यालयों में 11 उच्च शिक्षा विभाग के अधीन थे और दो अन्य विभागों के अंतर्गत संचालित होते थे। वर्ष 2026 में कुल 81 विश्वविद्यालयों में उच्च शिक्षा विभाग के अंतर्गत 17 शासकीय और 54 निजी विश्वविद्यालय हैं। इसके अलावा 10 विश्वविद्यालय अन्य विभागों के तहत संचालित हो रहे हैं। विश्वविद्यालयों की संख्या में हुआ यह विस्तार विद्यार्थियों के लिए उच्च शिक्षा के संस्थागत विकल्प बढ़ने और विभिन्न क्षेत्रों में अवसरों के विस्तार को दर्शाता है।
2.46 लाख से बढ़कर 12.10 लाख हुए प्रवेश
संस्थानों के विस्तार के साथ उच्च शिक्षा में विद्यार्थियों की भागीदारी भी बढ़ी है। शैक्षणिक सत्र 2002-03 में प्रदेश में 2 लाख 46 हजार 634 विद्यार्थी महाविद्यालयों में प्रवेशित हुए थे। शैक्षणिक सत्र 2024-25 में यह संख्या बढ़कर 12 लाख 10 हजार 635 हो गई। इस तरह 22 वर्षों में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों की संख्या में 9 लाख 64 हजार 1 की वृद्धि हुई और यह आंकड़ा करीब 4.9 गुना हो गया।
उच्च शिक्षा का बजट करीब 15 गुना बढ़ा
उच्च शिक्षा के संस्थागत विस्तार के साथ सरकार के बजट प्रावधान में भी बढ़ोतरी हुई है। वर्ष 2002-03 में उच्च शिक्षा विभाग के लिए 290.43 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान था। वर्ष 2026-27 में यह बढ़कर 4,296.91 करोड़ रुपये हो गया। इस अवधि में बजट में 4,006.48 करोड़ रुपये की वृद्धि हुई और यह करीब 14.8 गुना बढ़ा।
उच्च शिक्षा के क्षेत्र में हुए बदलाव केवल संस्थानों की संख्या तक सीमित नहीं रहे। शासकीय महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों के विस्तार से संस्थागत आधार मजबूत हुआ है। विद्यार्थियों की बढ़ती संख्या ने उच्च शिक्षा की पहुंच में विस्तार को रेखांकित किया है। बढ़े हुए बजट से अधोसंरचना और शैक्षणिक सुविधाओं के विकास के लिए संसाधन बढ़े हैं। इसके साथ ई-प्रवेश ने प्रवेश प्रक्रिया को डिजिटल स्वरूप दिया है।
















