भोपाल, 23 सितंबर।
बच्चों की मासूम कल्पनाओं को पंख देने और बाल मन की जिज्ञासाओं को सही दिशा प्रदान करने के उद्देश्य से मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में आगामी 26 अक्टूबर को एक भव्य 'बाल साहित्यकार सम्मेलन' का आयोजन किया जाने वाला है।
अर्चना प्रकाशन न्यास के बैनर तले आयोजित होने वाले इस अनूठे सम्मेलन में न केवल मध्य प्रदेश बल्कि देश के तमाम हिस्सों से प्रतिष्ठित बाल साहित्यकार और साहित्य प्रेमी बड़ी संख्या में शिरकत करेंगे।
इस विशेष आयोजन के दौरान बाल साहित्य पर आधारित एक आकर्षक प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी, जो दर्शकों के लिए मुख्य आकर्षण का केंद्र बनेगी।
इस सम्मेलन में मध्य प्रदेश साहित्य अकादमी और मध्य प्रदेश बाल अधिकार संरक्षण आयोग की सहभागिता इसे बाल अधिकारों, बच्चों के संस्कार, उनकी रचनात्मकता और बाल मनोविज्ञान के गंभीर विमर्श से जोड़ने का एक अनूठा माध्यम बना रही है।
देशभर के नामचीन रचनाकारों का होगा महाकुंभ
राजधानी भोपाल में होने जा रहा यह समागम देश के विभिन्न अंचलों के बाल लेखकों को एक ही मंच पर लाने का काम करेगा।
अर्चना प्रकाशन न्यास की हालिया बैठक में इस सम्मेलन की रूपरेखा तैयार की गई, जिसमें मध्य प्रदेश साहित्य अकादमी के निदेशक विकास दवे, न्यास के निदेशक ओमप्रकाश गुप्ता, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के क्षेत्र प्रचार प्रमुख कैलाश चंद्र, बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. निवेदिता शर्मा के साथ-साथ उमेश सिंह, नुसरत मेहंदी, महेश सक्सेना, गोपेश्वर बाजपेयी, गोकुल सोनी, मीनू पांडे, गीत धीर, मृदुल त्यागी, सुदर्शन व्यास और देवीदयाल जैसे कई दिग्गज साहित्यकार उपस्थित रहे।
बाहरी राज्यों से आने वाले रचनाकारों की मौजूदगी से प्रदेश के लेखकों को राष्ट्रीय स्तर के साहित्यिक अनुभवों और प्रयोगों से रूबरू होने का बेहतरीन अवसर मिलेगा।
मनोरंजन से कहीं आगे है बाल साहित्य की भूमिका
बैठक के दौरान इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि बच्चों का साहित्य केवल उनके मनोरंजन का साधन नहीं है, बल्कि यह उनके व्यक्तित्व के सर्वांगीण विकास, भाषा शैली, कल्पनाशक्ति, नैतिक मूल्यों और सामाजिक संवेदनाओं की नींव रखता है।
कहानियों और कविताओं के जरिए ही बच्चे अपने आसपास के परिवेश, प्रकृति, मित्रता और मानवीय रिश्तों की बारीकियों को समझते हैं।
आज के डिजिटल युग में जब स्क्रीन का बोलबाला है और बच्चों की पठन संस्कृति तेजी से बदल रही है, तब उच्च कोटि के बाल साहित्य की प्रासंगिकता और अधिक बढ़ जाती है।
यह सम्मेलन इस बात पर भी मंथन करेगा कि वर्तमान पीढ़ी की भाषा और जिज्ञासाओं के अनुकूल किस प्रकार की रचनाएं सृजित की जाएं जो उन्हें उनकी मूल संस्कृति से जोड़े रखें।
बाल अधिकारों और संवेदनशीलता का अनूठा संगम
बाल अधिकार संरक्षण आयोग की सहभागिता इस आयोजन को एक विस्तृत सामाजिक आयाम दे रही है।
आयोग की अध्यक्ष डॉ. निवेदिता शर्मा का मानना है कि बाल साहित्य बच्चों के मन की गहराइयों तक उतरने का सबसे सरल माध्यम है, जो उनमें आत्मविश्वास और सही-गलत का भेद करने की दृष्टि जगाता है।
उन्होंने कहा कि बाल अधिकारों की रक्षा केवल कानूनी दायरे तक सीमित नहीं हो सकती, बल्कि इसके लिए समाज में एक संवेदनशील माहौल तैयार करना जरूरी है जिसमें साहित्य और संस्कृति की भूमिका सबसे अहम होती है।
वहीं, साहित्य अकादमी के निदेशक विकास दवे ने कहा कि यह सम्मेलन नए और पुराने लेखकों के बीच सेतु का काम करेगा, जिससे उभरती हुई पीढ़ी को बाल साहित्य की बदलती आधुनिक जरूरतों को समझने का अवसर मिलेगा।
गुणवत्तापूर्ण साहित्य और स्थानीय प्रतिभाओं को बढ़ावा
अर्चना प्रकाशन न्यास के निदेशक ओमप्रकाश गुप्ता ने बताया कि इस राष्ट्रीय आयोजन से भोपाल देश भर में बाल साहित्य के बड़े केंद्र के रूप में अपनी पहचान को और अधिक प्रगाढ़ करेगा।
इससे न केवल प्रदेश के बच्चों के लिए बेहतरीन पुस्तकों की उपलब्धता सुनिश्चित होगी, बल्कि छोटे-छोटे शहरों में छिपी स्थानीय बाल साहित्यकारों की प्रतिभाओं को भी एक बड़ा राष्ट्रीय मंच मिल सकेगा।
इस पूरे सम्मेलन में लगने वाली विशेष पुस्तक प्रदर्शनी बच्चों और अभिभावकों को साहित्य के ऐतिहासिक सफर से जोड़ेगी, जबकि ऑनलाइन पंजीयन की सुविधा के जरिए देश भर के इच्छुक प्रतिभागी आसानी से इस महाकुंभ का हिस्सा बन सकते हैं।
















