ग्वालियर, 18 सितंबर।
मध्य प्रदेश की लाड़ली बहना योजना को लेकर हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ में जनहित याचिका दायर की गई है। याचिका में योजना की उपयोगिता, सरकारी खजाने पर पड़ने वाले वित्तीय भार और महिलाओं को दी जा रही राशि के इस्तेमाल से जुड़े सवाल उठाए गए हैं। अदालत ने राज्य सरकार को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब मांगा है। साथ ही योजना के लाभार्थियों, भुगतान और संबंधित रिकॉर्ड की जानकारी भी मांगी गई है।
यह जनहित याचिका ग्वालियर निवासी सुधा दुबे की ओर से दायर की गई है। याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अनिल मिश्रा ने अदालत में पक्ष रखा। याचिका में योजना के तहत सरकारी राशि के उपयोग और महिलाओं को सीधे आर्थिक सहायता देने के तरीके को लेकर सवाल किए गए हैं। याचिकाकर्ता की ओर से यह तर्क रखा गया है कि महिलाओं के लिए रोजगार और स्थायी आर्थिक अवसर तैयार करने पर भी सरकारी धन का इस्तेमाल किया जा सकता है। यह याचिकाकर्ता की दलील है, जिस पर सरकार का पक्ष अभी सामने आना बाकी है।
याचिका में योजना के तहत हर महीने करीब 1,900 करोड़ रुपये खर्च होने का दावा किया गया है। अदालत ने सरकार से योजना के लाभार्थियों की संख्या, उन्हें दी जाने वाली राशि और भुगतान से संबंधित रिकॉर्ड पेश करने को कहा है। सरकार को चार सप्ताह के भीतर अपना जवाब दाखिल करना होगा।
मामले में फिलहाल हाईकोर्ट ने लाड़ली बहना योजना को बंद करने या मासिक भुगतान रोकने का कोई आदेश नहीं दिया है। अब सरकार के जवाब और मांगे गए रिकॉर्ड के आधार पर मामले की आगे सुनवाई होगी।
















