रांची, 18 सितंबर।
झारखंड उच्च न्यायालय ने जेएसएससी-सीजीएल सहित विभिन्न भर्ती परीक्षाओं और नियुक्तियों को रद्द करने के राज्य सरकार के फैसले पर लगी रोक को शुक्रवार को जारी रखा। न्यायमूर्ति दीपक रोशन की अदालत में कई याचिकाओं पर सुनवाई हुई।
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने अपना शपथ पत्र अदालत में दाखिल किया। याचिकाकर्ताओं ने इस पर जवाब देने के लिए समय मांगा। मामले की अगली सुनवाई 7 अक्टूबर को निर्धारित की गई है।
अदालत ने मौखिक टिप्पणी में कहा कि केवल एक अधिसूचना जारी करके स्थायी नियुक्ति पा चुके कर्मचारियों को सेवा से हटाया नहीं जा सकता। अदालत ने यह भी कहा कि अब तक सामने आए तथ्यों से प्रथमदृष्टया सभी नियुक्तियां पूरी तरह सही प्रक्रिया से हुई प्रतीत नहीं होतीं, लेकिन इससे यह नहीं माना जा सकता कि हर नियुक्ति में गड़बड़ी हुई है।
राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि जेपीएससी को परीक्षा कराने और नियुक्ति प्रक्रिया पूरी करने में दो से तीन वर्ष लग सकते हैं। करीब 2,700 नियुक्तियां एक साथ रद्द होने पर बड़ी संख्या में अधिकारियों और कर्मचारियों की नौकरी प्रभावित होगी।
मामले की जांच की निगरानी के लिए उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश गौतम कुमार चौधरी को नियुक्त किया गया है। सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी आर.के. मल्लिक को नोडल अधिकारी की जिम्मेदारी दी गई है।
याचिकाकर्ताओं की ओर से वरीय अधिवक्ता राजीव रंजन, अधिवक्ता श्रेय मिश्रा, इंद्रजीत सिन्हा और अमृतांश वत्स ने पक्ष रखा। सरकार की ओर से महाधिवक्ता रोहिताश्य राय और वरीय अधिवक्ता मीनाक्षी अरोड़ा ने दलीलें पेश कीं।
सीजीएल रद्द करने को सरकार ने बताया दिशा-निर्देशों के अनुरूपराज्य सरकार ने अपने शपथ पत्र में जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा रद्द करने के फैसले को उच्चतम न्यायालय के दिशा-निर्देशों के अनुरूप बताया है। कार्मिक विभाग के संयुक्त सचिव अमर कुमार की ओर से दाखिल शपथ पत्र में कहा गया कि कथित अनियमितताओं के कारण पूरी परीक्षा प्रक्रिया दूषित हो गई थी।
सरकार के अनुसार ऐसी स्थिति में सही तरीके से परीक्षा पास करने वाले और अनुचित तरीके से लाभ लेने वाले अभ्यर्थियों के बीच अंतर करना संभव नहीं था। अपने पक्ष में सरकार ने उच्चतम न्यायालय के विभिन्न फैसलों और दिशा-निर्देशों का हवाला दिया।
शपथ पत्र में वानशिखा बनाम केंद्र सरकार मामले का उल्लेख भी किया गया है। सरकार ने कहा कि यदि परीक्षा की पूरी प्रक्रिया दूषित हो जाए और सही तथा गलत तरीके से चयनित अभ्यर्थियों को अलग करना संभव न हो, तो पूरी परीक्षा रद्द की जा सकती है।
सरकार के मुताबिक सीजीएल परीक्षा से जुड़े गोपनीय काम आईसीएन टेक्नोलॉजी को दिए गए थे। इनमें प्रश्नपत्र छापने और उन्हें परीक्षा केंद्रों तक पहुंचाने सहित अन्य कार्य शामिल थे।
जांच के दौरान कथित गड़बड़ी के मामले में कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सोमांश प्रकाश समेत 28 लोगों की गिरफ्तारी की जानकारी सरकार ने दी है। मामले की जांच जारी है और इस संबंध में 265 लोगों को नोटिस जारी किए गए हैं।
सरकार ने बताया कि परीक्षा संचालन से जुड़ी एजेंसी पर बड़े स्तर पर अनियमितताओं के आरोप जांच में सामने आए हैं। पैसे लेकर अभ्यर्थियों को प्रश्नों के उत्तर रटाने और परीक्षा में अनुचित लाभ पहुंचाने से संबंधित तथ्य भी जांच में सामने आने की बात कही गई है।
शपथ पत्र के अनुसार नेपाल के अलावा आसनसोल, कोलकाता, बिहार, झरिया और बोकारो में ऐसे मामलों की जानकारी मिली है। नेपाल में प्रश्नों के उत्तर रटाए गए 28 अभ्यर्थियों में से 10 के सीजीएल परीक्षा में सफल होने की बात भी सरकार ने कही है।
सरकार के अनुसार सीजीएल में चयनित अभ्यर्थियों को दिए गए नियुक्ति पत्र में स्पष्ट था कि उनकी नियुक्ति सीआईडी जांच के परिणाम से प्रभावित होगी। जांच में पूरी परीक्षा प्रक्रिया के दूषित होने की बात सामने आने के बाद सही और गलत तरीके से चयनित अभ्यर्थियों में अंतर करना मुश्किल पाया गया।
इसके बाद मंत्रिमंडल ने परीक्षा रद्द करने का फैसला लिया और इसी आधार पर आदेश जारी किया गया।
22 परीक्षाएं रद्द, छह स्थगित और 17 जांच के दायरे मेंसीआईडी जांच से सामने आए तथ्यों के आधार पर राज्य सरकार ने 18 अगस्त की देर रात जेएसएससी-सीजीएल समेत अलग-अलग भर्ती परीक्षाओं को रद्द करने की घोषणा की थी। वर्ष 2014 से आयोजित विभिन्न नियुक्ति परीक्षाओं में संभावित अनियमितताओं की जांच कराने का निर्णय भी लिया गया था।
इसके बाद कार्मिक, प्रशासनिक सुधार एवं राजभाषा विभाग ने संबंधित अधिसूचनाएं जारी कीं। इनमें 22 परीक्षाओं को रद्द करने, छह परीक्षा प्रक्रियाओं को स्थगित रखने और 17 परीक्षाओं को जांच के दायरे में रखने की जानकारी दी गई है।
















