नई दिल्ली, 18 सितंबर।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी शनिवार को विज्ञान भवन में ‘पर्यावरण और जलवायु गतिशीलता का भविष्य’ विषय पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन करेंगे। राष्ट्रीय हरित अधिकरण की ओर से आयोजित यह दो दिवसीय सम्मेलन 19 और 20 सितंबर को होगा।
प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार, सम्मेलन में पर्यावरण और जलवायु से जुड़ी प्रमुख चुनौतियों पर चर्चा की जाएगी। इसके साथ ही पर्यावरणीय शासन व्यवस्था को मजबूत करने के लिए जरूरी उपायों पर विचार-विमर्श होगा। कार्यक्रम में भारत के उच्चतम न्यायालय और विभिन्न उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों के साथ जिला न्यायालयों के न्यायाधीश, विभिन्न मंत्रालयों के सचिव और वरिष्ठ अधिकारी हिस्सा लेंगे। पर्यावरण विशेषज्ञ और अन्य संबंधित पक्ष भी सम्मेलन में शामिल होंगे।
कार्यक्रम में 17 देशों के प्रतिष्ठित न्यायाधीशों और न्यायिक प्रतिनिधियों की भागीदारी होगी। राज्य न्यायिक अकादमियों, राज्य विधिक सेवा प्राधिकरणों, राज्य विशेषज्ञ मूल्यांकन समितियों, राज्य पर्यावरण प्रभाव आकलन प्राधिकरणों और राज्य आर्द्रभूमि प्राधिकरणों के प्रतिनिधि भी इसमें हिस्सा लेंगे।
सम्मेलन के दौरान विभिन्न देशों और संस्थानों के बीच न्यायिक दृष्टिकोण, वैज्ञानिक ज्ञान, पर्यावरणीय शासन की प्रक्रियाओं और संस्थागत अनुभवों का आदान-प्रदान किया जाएगा। नीति निर्माण, उसके क्रियान्वयन और प्रवर्तन में मौजूद कमियों के साथ पर्यावरण तथा जलवायु से जुड़ी चुनौतियों पर भी चर्चा होगी।
सम्मेलन का उद्देश्य पर्यावरणीय शासन व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने और विभिन्न संस्थानों के बीच सहयोग मजबूत करने के उपाय तलाशना है।
















