उज्जैन, 18 सितंबर।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने कहा कि धर्म को केवल रिलिजन के अर्थ में नहीं समझना चाहिए। धर्म जीवन जीने का अनुशासन है। किसी इच्छा की पूर्ति, भय, लालच या प्राण बचाने के लिए भी धर्म का त्याग नहीं किया जाना चाहिए। सुख और दुख आते-जाते रहते हैं, लेकिन धर्म हमेशा बना रहता है।
डॉ. भागवत शुक्रवार को उज्जैन प्रवास के दौरान देवास रोड स्थित गीता भवन में आयोजित तीन दिवसीय युवा धर्म संसद-2026 के दूसरे उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने दीप प्रज्ज्वलित कर और वंदे मातरम के साथ कार्यक्रम की शुरुआत की। इस दौरान उन्होंने युवाओं को धर्म का वास्तविक अर्थ समझाते हुए जीवन में इसके महत्व पर मार्गदर्शन दिया।
उन्होंने कहा कि रिलीजन और धर्म एक समान नहीं हैं। अंग्रेजी शब्दकोश में धर्म के लिए सटीक शब्द नहीं मिलता। रिलीजन शब्द की उत्पत्ति रिलिजियो से हुई है, जिसका अर्थ बांधने से जुड़ा है, जबकि धर्म व्यक्ति को मुक्त करता है। उनके अनुसार, भारत में धर्म के आचरण, कर्मकांड और अनुशासन को देखकर पश्चिमी लोगों ने इसे अपने यहां के रिलीजन के समान समझ लिया और बाद में भारत में भी धर्म को रिलीजन कहा जाने लगा।
डॉ. भागवत ने कहा कि धर्म के कर्मकांड और अनुशासन उसके अभ्यास का हिस्सा हैं, लेकिन कर्मकांड ही पूरा धर्म नहीं है। उन्होंने स्वामी विवेकानंद का स्मरण करते हुए कहा कि भारत धर्मप्राण देश है। नए विचार को समझने के लिए पहले मन को स्थिर और खाली करना जरूरी है, क्योंकि पुरानी बातों से मन भरा होने पर नया सीखना कठिन होता है।
उन्होंने कहा कि धर्म जीवन की शुरुआत से अंत तक साथ रहता है और भौतिक सुख, इच्छाओं तथा आकांक्षाओं की पूर्ति के साथ मोक्ष की ओर ले जाता है। गीता और रामायण को केवल बुढ़ापे में पढ़ने वाली किताबें मानना उचित नहीं है। धर्म युवाओं को दिशा देता है। उन्होंने कहा कि किसी को पीड़ा न देना सबसे बड़ा धर्म है और किसी को पीड़ा पहुंचाना महापाप है।
सेवाज्ञ संस्थानम् की ओर से सिद्धपीठ हनुमत निवास अयोध्या के पीठाधीश्वर एवं संरक्षक आचार्य मिथिलेशनन्दिनीशरणजी महाराज के मार्गदर्शन में 17 से 19 सितंबर तक युवा धर्म संसद-2026 आयोजित हो रही है। इसमें देशभर से करीब 1,700 युवा छात्र-छात्राएं और 300 से अधिक विद्वान, शिक्षक, शोधकर्ता व धर्माचार्य शामिल हो रहे हैं। पटकथा लेखक और गीतकार मनोज मुंतशिर भी कार्यक्रम में शामिल हुए। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 19 सितंबर को समापन सत्र में शामिल होंगे।
















