थिम्फू, 18 सितंबर।
भारत ने भूटान के डेयरी क्षेत्र को मजबूत करने की दिशा में 43 जर्सी गायें उपहार में दी हैं। यह पहल दोनों देशों के बीच कृषि और पशुपालन क्षेत्र में सहयोग को आगे बढ़ाने के साथ भूटान में दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के उद्देश्य से की गई है। भारत और भूटान के बीच कूटनीतिक तथा रणनीतिक संबंधों के साथ अब कृषि क्षेत्र में भी साझेदारी को विस्तार मिल रहा है।
विदेश मंत्री एस. जयशंकर की 16 से 17 सितंबर की भूटान यात्रा के दौरान यह सौगात दी गई। बूमथांग स्थित नेशनल कैटल ब्रीडिंग सेंटर में आयोजित विशेष कार्यक्रम में भारत की ओर से 43 जर्सी गायें सौंपी गईं। इस पहल का मकसद बेहतर नस्ल और आधुनिक तकनीक के माध्यम से स्थानीय डेयरी उत्पादन को बढ़ाना है। बूमथांग का यह केंद्र भूटान में पशुपालन को उन्नत करने के लिए काम कर रहा है।
जर्सी नस्ल की गायें अपनी अच्छी दुग्ध उत्पादन क्षमता के लिए जानी जाती हैं। कृषि और डेयरी विशेषज्ञों के अनुसार, स्वस्थ तथा उचित देखभाल वाली जर्सी गाय सामान्य तौर पर एक दिन में करीब 15 से 30 लीटर तक दूध दे सकती है। इस नस्ल के दूध में वसा और ठोस पदार्थों की मात्रा भी अच्छी होती है। भूटान के ठंडे और पहाड़ी इलाकों में इनके आसानी से अनुकूल होने की क्षमता को भी उपयोगी माना जाता है।
भारत से मिली इन 43 गायों का लाभ भूटान के स्थानीय किसानों तक पहुंचने की उम्मीद है। नेशनल कैटल ब्रीडिंग सेंटर के उन्नत प्रजनन कार्यक्रम से करीब 40 हजार से अधिक किसानों को प्रत्यक्ष लाभ मिलने की संभावना बताई गई है। आगे जर्सी नस्ल का प्रजनन बढ़ने पर किसानों को बेहतर गुणवत्ता वाले बछड़े और उन्नत नस्लें मिल सकेंगी। इससे स्थानीय स्तर पर दूध की कमी कम करने और भूटान को डेयरी उत्पादों के मामले में अधिक आत्मनिर्भर बनाने में मदद मिल सकती है।
















