बिलासपुर, 19 सितंबर।
छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के कुसमी क्षेत्र अंतर्गत हंसपुर में बॉक्साइट परिवहन के विवाद के दौरान ग्रामीण रामनरेश की मौत के मामले में कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने निलंबित तत्कालीन कुसमी एसडीएम करुण डहरिया सहित तीन मुख्य आरोपितों की नियमित जमानत याचिका को खारिज कर दिया है। न्यायमूर्ति राकेश मोहन पांडेय की एकल पीठ ने गत 17 सितंबर को तीनों आपराधिक अपीलों पर सुनवाई पूरी करने के बाद यह फैसला सुनाया। आरोपितों पर भारतीय न्याय संहिता की गंभीर धाराओं के साथ-साथ अनुसूचित जाति एवं जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत मामला दर्ज है और वे इसी वर्ष फरवरी माह से न्यायिक हिरासत में बंद हैं।
घटनाक्रम के अनुसार, गत 15 फरवरी 2026 की रात हंसपुर के पास अवैध बॉक्साइट परिवहन को लेकर उपजे विवाद के दौरान ग्रामीणों और अधिकारियों के बीच झड़प हो गई थी, जिसमें रामनरेश गंभीर रूप से घायल हो गया था और बाद में आंतरिक रक्तस्राव के कारण उसकी मृत्यु हो गई थी। बचाव पक्ष की ओर से उच्च न्यायालय में दलील दी गई थी कि कलेक्टर की जांच रिपोर्ट में आरोपितों की संलिप्तता नहीं पाई गई है तथा जांच पूरी हो चुकी है, इसलिए उन्हें जमानत का लाभ मिलना चाहिए। हालांकि, महाधिवक्ता कार्यालय और आपत्तिकर्ता के वकीलों ने इसका विरोध करते हुए कहा कि चश्मदीद गवाहों और पुलिसकर्मियों के बयानों में आरोपितों द्वारा मारपीट किए जाने के स्पष्ट प्रमाण हैं। दोनों पक्षों को सुनने के बाद उच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि जमानत के इस चरण में साक्ष्यों की विस्तृत समीक्षा करना उचित नहीं है और प्रथम दृष्टया गंभीर आरोपों को देखते हुए फिलहाल जमानत नहीं दी जा सकती।
















