जमशेदपुर, 19 सितंबर।
झारखंड में माइन्स एंड मिनरल्स (डेवलपमेंट एंड रेगुलेशन) एक्ट को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। पूर्व मुख्यमंत्री और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने शनिवार को जमशेदपुर में प्रेस वार्ता कर झामुमो-कांग्रेस गठबंधन सरकार पर इस कानून को लेकर लोगों को गुमराह करने का आरोप लगाया।
मरांडी ने कहा कि एमएमडीआर एक्ट संसद से पारित होने और राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद कानून बन चुका है तथा देशभर में लागू है। उन्होंने कहा कि झारखंड में लागू इसके प्रावधान ओडिशा, छत्तीसगढ़ और अन्य राज्यों में भी प्रभावी होंगे।
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि मेजर मिनरल्स पर राज्य सरकारों की ओर से लगाए जा रहे अतिरिक्त कर से खनिज आधारित उद्योगों की लागत बढ़ रही है। इससे उद्योगों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता पर असर पड़ने की बात उन्होंने कही। मरांडी ने दावा किया कि कोयले पर प्रति टन 450 रुपये और आयरन ओर पर प्रति टन 600 रुपये अतिरिक्त कर लगाया गया है। उनके अनुसार 30 टन कोयले की खेप पर 13,500 रुपये और इतनी ही मात्रा में आयरन ओर पर 18 हजार रुपये का अतिरिक्त भार पड़ता है।
मरांडी ने कहा कि अतिरिक्त लागत का असर जमशेदपुर के स्टील उद्योग पर पड़ सकता है। उन्होंने आशंका जताई कि महंगे खनिज के कारण उद्योगों को दूसरे राज्यों से कच्चा माल मंगाना पड़ सकता है, जिसका प्रभाव झारखंड में उत्पादन और रोजगार पर पड़ सकता है।
उन्होंने दावा किया कि खनिज राजस्व में राज्यों की हिस्सेदारी 60.24 प्रतिशत से बढ़कर 88.53 प्रतिशत हो गई है। उनके अनुसार 2014-15 में राज्यों को करीब 25 हजार करोड़ रुपये मिले थे, जो 2025-26 में बढ़कर 1,14,549 करोड़ रुपये हो गए। उन्होंने यह भी दावा किया कि जिला खनिज फाउंडेशन के माध्यम से झारखंड को पिछले दस वर्षों में 19 हजार करोड़ रुपये से अधिक प्राप्त हुए हैं।
मरांडी ने खदानों की नीलामी में देरी, बंद खदानों और अवैध खनन के मुद्दे पर भी राज्य सरकार से सवाल किए। उन्होंने सारंडा क्षेत्र की बंद आयरन ओर खदानों का उल्लेख करते हुए कहा कि इससे स्थानीय रोजगार और आर्थिक गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं।
















