भोपाल, 21 सितंबर।
कभी संसाधनों की कमी और पिछड़ेपन की मिसाल माना जाने वाला मध्य प्रदेश आज कृषि समृद्धि और आर्थिक स्वावलंबन की एक नई इबारत लिख रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के दूरदर्शी नेतृत्व और किसानों के अथक परिश्रम के बल पर राज्य ने न केवल अपनी विकास दर को ऊंचाई दी है, बल्कि देश के प्रमुख 'फूड-बास्केट' के रूप में अपनी मजबूत पहचान स्थापित की है। सरकार द्वारा वर्ष 2026 को 'कृषक कल्याण वर्ष' और 'रोजगार आधारित कृषि उद्योग विकास वर्ष' के रूप में मनाया जा रहा है, जिसका मुख्य उद्देश्य आधुनिक तकनीक, वैज्ञानिक पद्धतियों और नवाचार के जरिए अन्नदाताओं की आय को बहुगुणी बनाना है। कृषि मंत्री एदल सिंह कंषाना के अनुसार, सरकार की किसान-हितैषी नीतियों और पारदर्शी व्यवस्थाओं के चलते आज मध्य प्रदेश कृषि क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में शुमार हो चुका है।
वर्तमान में मध्य प्रदेश खाद्यान्न उत्पादन के मामले में पूरे देश में दूसरे स्थान पर है, जबकि गेहूं उत्पादन के पारंपरिक गढ़ों को पीछे छोड़ते हुए यह देश का सबसे बड़ा गेहूं उत्पादक राज्य बन गया है। यहां सालाना 365.11 लाख मीट्रिक टन से अधिक गेहूं का उत्पादन हो रहा है, जिसमें अंतरराष्ट्रीय बाजार में अत्यधिक मांग वाले शरबती और ड्यूरम गेहूं की हिस्सेदारी प्रमुख है। इसके अलावा, जैविक खेती में 27 प्रतिशत से अधिक की राष्ट्रीय हिस्सेदारी के साथ प्रदेश देश में शीर्ष पर है, और प्राकृतिक खेती अपनाने वाले किसानों को देसी गोपालन के लिए विशेष अनुदान दिया जा रहा है। फसल प्रबंधन में एग्री-जीआईएस प्रणाली, ड्रोन सर्वेक्षण और 'सारा' ऐप जैसी आधुनिक तकनीकों के उपयोग से डिजिटल मैपिंग और सटीक फसल आकलन को बढ़ावा मिला है। टमाटर, धनिया, लहसुन और मोटे अनाजों (मिलेट्स) के उत्पादन में भी राज्य ने देश भर में अपनी विशिष्ट जगह बनाई है, जिससे मध्य प्रदेश की यह कृषि विकास यात्रा आज देश भर के लिए एक अनूठा मॉडल बन चुकी है।
















