नई दिल्ली, 21 सितंबर।
राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने एक्सप्रेसवे को छोड़कर हाई-स्पीड एक्सेस कंट्रोल राष्ट्रीय राजमार्गों की योजना और डिजाइन के लिए नए दिशानिर्देश जारी किए हैं। इनका उद्देश्य राजमार्गों के लिए एक समान तकनीकी मानक तय करना, सड़क सुरक्षा बढ़ाना और यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाना है।
केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के अनुसार, नए मानक आगामी चार और छह लेन वाले ग्रीनफील्ड तथा ब्राउनफील्ड हाई-स्पीड एक्सेस कंट्रोल राष्ट्रीय राजमार्गों पर लागू होंगे। इससे विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार करने की प्रक्रिया में एकरूपता आएगी और डिजाइन से जुड़ी असमानताएं कम होंगी।
मंत्रालय ने बताया कि दिशानिर्देश ‘विकसित भारत-2047’ के तहत 50 हजार किलोमीटर एक्सेस कंट्रोल हाई-स्पीड कॉरिडोर विकसित करने की दीर्घकालिक योजना के अनुरूप तैयार किए गए हैं। इससे पहले ऐसे राजमार्गों की योजना और डिजाइन के लिए एकीकृत मानक उपलब्ध नहीं था।
नए प्रावधानों में सड़क सुरक्षा को प्राथमिकता दी गई है। हाई-स्पीड कॉरिडोर पर प्रवेश और निकास बिंदुओं से पहले स्पष्ट एवं पर्याप्त दूरी पर संकेतक लगाने की व्यवस्था की गई है, ताकि वाहन चालक समय रहते दिशा बदल सकें और दुर्घटनाओं की आशंका कम हो।
यातायात की मात्रा के आधार पर सड़क की चौड़ाई और लेन संरचना निर्धारित की गई है। प्रतिदिन 15 हजार तक वाहनों वाले चार लेन राजमार्गों के लिए 60 मीटर चौड़ाई तय की गई है। 15 से 25 हजार वाहनों वाले मार्गों के लिए 70 मीटर चौड़ाई तथा चार और छह लेन की संरचना का प्रावधान है। 25 से 40 हजार वाहनों वाले मार्गों पर छह लेन सड़क और छह लेन संरचना के साथ 70 मीटर चौड़ाई रखी जाएगी।
दिशानिर्देशों में एक्सप्रेसवे, राष्ट्रीय राजमार्ग, राज्य राजमार्ग और अन्य प्रमुख मार्गों से संपर्क के लिए इंटरचेंज और रैंप विकसित करने की व्यवस्था की गई है। हवाई अड्डों, बंदरगाहों, बहु-मॉडल लॉजिस्टिक्स पार्क, औद्योगिक क्षेत्रों और प्रमुख पर्यटन स्थलों तक संपर्क बेहतर करने पर भी जोर दिया गया है।
अतिक्रमण, अनधिकृत प्रवेश और आवारा पशुओं की आवाजाही रोकने के लिए हाई-स्पीड कॉरिडोर के बाहरी हिस्से में एक मीटर ऊंची सीमा दीवार बनाने का प्रावधान भी किया गया है।
















