नई दिल्ली, 21 सितंबर।
भारतीय सेना के टी-72 और टी-90 टैंकों की क्षमता बढ़ाने के लिए रक्षा मंत्रालय ने 586 करोड़ रुपये का करार किया है। इसके तहत ऑग्जिलियरी पावर यूनिट्स खरीदी जाएंगी। सोमवार को नई दिल्ली में रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह की मौजूदगी में एक्यूरेट इंडस्ट्रियल कंट्रोल्स प्राइवेट लिमिटेड के साथ समझौते पर हस्ताक्षर किए गए।
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, ऑग्जिलियरी पावर यूनिट्स टैंकों के फायर कंट्रोल सिस्टम, फायरिंग सर्किट, गन स्टेबिलाइजेशन सिस्टम और अन्य सहायक उपकरणों को बिजली उपलब्ध कराने का वैकल्पिक माध्यम हैं। देश में निर्मित इन यूनिट्स के शामिल होने से सेना की मैकेनाइज्ड फॉर्मेशन की परिचालन तैयारी, विश्वसनीयता और टिकाऊपन को मजबूती मिलेगी।
यह खरीद बख्तरबंद प्लेटफॉर्म के जरूरी उप-प्रणालियों के स्वदेशीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, स्वदेशी तकनीक को उत्पादन और सेना में शामिल करने की प्रक्रिया के जरिए यह उपलब्धि हासिल हुई है। समझौते को रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और भारतीय रक्षा उद्योग को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में भी अहम माना जा रहा है।
रूस में निर्मित टी-72 भारतीय सेना के प्रमुख टैंकों में शामिल है। यह फिलहाल 780 हॉर्स पावर के इंजन से संचालित होता है। भारतीय सेना के पास इसके तीन संस्करण हैं। अब मौजूदा टी-72 बेड़े को 1000 हॉर्स पावर के इंजन से लैस करने की तैयारी है। इससे टैंकों की गतिशीलता और युद्धक क्षमता बढ़ने की उम्मीद है।
टी-72 को सोवियत रूस ने 1960 के दशक में विकसित किया था। 1962 के भारत-चीन युद्ध के बाद सेना के आधुनिकीकरण की प्रक्रिया के तहत भारत ने करीब 1970 में रूस से टी-72 टैंक खरीदे थे।
टी-90 भारतीय सेना का प्रमुख युद्धक टैंक है, जिसे भारत ने अपनी जरूरतों के अनुसार विकसित कर ‘भीष्म’ नाम दिया है। चीन के साथ गतिरोध के दौरान इसे ऊंचाई वाले क्षेत्रों में तैनात किया गया था। अधिक ऊंचाई वाले इलाकों में बेहतर संचालन के लिए टी-90 में लगे 1000 हॉर्स पावर के इंजन को 1350 हॉर्स पावर के इंजन से अपग्रेड करने का प्रस्ताव भी दिया गया था। आवश्यकता की स्वीकृति मिलने के बाद इंजन बदलने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
















