नई दिल्ली, 21 सितंबर।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया को लेकर चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर अपने बयान में कहा कि यह प्रक्रिया केवल कागजी सुधार तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके कारण नागरिकों के लोकतांत्रिक अधिकारों पर भी असर पड़ रहा है। खरगे ने दावा किया कि दिल्ली में चल रही इस प्रक्रिया के तहत भाजपा के वरिष्ठ नेताओं, पूर्व उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी, केंद्रीय मंत्रियों, उपराज्यपाल और यहाँ तक कि भारत रत्न प्राप्त एक प्रतिष्ठित वैज्ञानिक व पूर्व नौसेना प्रमुख को भी नोटिस थमाए गए हैं। इसके अलावा, उन्होंने पश्चिम बंगाल का हवाला देते हुए कहा कि जिन लोगों के नाम सूची से हटाए गए थे, उन्हें बाद में अपील के बाद राहत मिली, जिससे शुरुआती छंटनी के आधार पर ही बड़े सवाल खड़े होते हैं।
कांग्रेस प्रमुख ने चुनाव आयोग की हालिया विज्ञप्ति में 'वीआईपी' या 'मार्क्ड इलेक्टर्स' शब्दों के इस्तेमाल पर भी कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है। उनका तर्क है कि भारतीय संविधान हर नागरिक को बराबरी का अधिकार देता है और 'एक व्यक्ति, एक वोट' की मूल भावना के साथ किसी भी विशेष श्रेणी का उल्लेख लोकतांत्रिक व्यवस्था के खिलाफ है। दूसरी ओर, दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी की ओर से स्पष्ट किया गया है कि नोटिस मिलने का मतलब यह नहीं है कि मतदाता का नाम सूची से स्वतः हटा दिया गया है, क्योंकि प्रत्येक नागरिक को अपना पक्ष रखने और सुनवाई का पूरा अवसर दिया जाएगा।
















