भोपाल, 21 सितंबर।
मध्य प्रदेश में उद्यानिकी क्षेत्र को उत्पादन से आगे बढ़ाकर प्रसंस्करण, ब्रांडिंग, बाजार और निर्यात से जोड़ने की तैयारी है। किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य दिलाने और स्थानीय से अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंच बढ़ाने के उद्देश्य से राज्य नीति आयोग ने सोमवार को भोपाल में नीति संवाद आयोजित किया। इसमें विशेषज्ञों, अधिकारियों, कृषक उत्पादक संगठनों, वित्तीय संस्थानों, उद्योग प्रतिनिधियों और तकनीकी संस्थाओं ने विचार साझा किए।
एमपीटी होटल पलाश रेजीडेंसी में आयोजित “मध्य प्रदेश में उद्यानिकी मूल्य श्रृंखलाओं का सुदृढ़ीकरण” संवाद की शुरुआत “समृद्ध मध्यप्रदेश@2047” पर आधारित लघु फिल्म के प्रदर्शन से हुई। कार्यक्रम में उद्यानिकी क्षेत्र की संभावनाओं और आगामी नीति की प्राथमिकताओं पर चर्चा की गई।
राज्य नीति आयोग के मुख्य कार्यपालन अधिकारी स्वरौचिष सोमवंशी ने कहा कि अब केवल उत्पादन बढ़ाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उत्पाद से बनने वाले अधिकतम मूल्य का लाभ किसानों तक पहुंचाना जरूरी है। वर्ष 2024-25 में प्रदेश में करीब 13.26 लाख हेक्टेयर में 259.86 लाख मीट्रिक टन सब्जियों और करीब 4.80 लाख हेक्टेयर में 102.07 लाख मीट्रिक टन फलों का उत्पादन हुआ।
योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग के सचिव श्रीमन शुक्ला ने कहा कि मालवा समेत प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों में विशिष्ट उद्यानिकी फसलों के लिए अनुकूल परिस्थितियां हैं। इन फसलों को प्रसंस्करण, पैकेजिंग, ब्रांडिंग और बाजार से जोड़ने पर किसानों को बेहतर मूल्य मिल सकता है।
प्रो. राजीव दीक्षित ने खेत से बाजार तक की कमियों को दूर करने के लिए नीति अनुसंधान, तकनीकी परीक्षण और संस्थागत क्षमता मजबूत करने पर जोर दिया। कृषि उत्पादन आयुक्त एवं अपर मुख्य सचिव के.सी. गुप्ता ने गुणवत्तापूर्ण बीज, उच्च तकनीक नर्सरी, प्रसंस्करण और समूह आधारित संरचना को प्राथमिकता देने की बात कही।
संवाद में बताया गया कि प्रदेश में करीब 28.60 लाख हेक्टेयर क्षेत्र से 438.05 लाख मीट्रिक टन उद्यानिकी उत्पादन हो रहा है। चर्चा में शीत भंडारण, पैक हाउस, ग्रेडिंग-सॉर्टिंग, प्राथमिक प्रसंस्करण, एफपीओ, गुणवत्ता प्रमाणीकरण, ट्रेसबिलिटी और निर्यात मानकों पर भी सुझाव लिए गए।
मंडी स्तर पर ग्रेडिंग, गुणवत्ता आधारित मूल्य निर्धारण, सौर प्रसंस्करण और कम लागत वाले शीत परिवहन को बढ़ावा देने के सुझाव भी सामने आए। संवाद से प्राप्त अनुशंसाओं को राज्य शासन के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा।
















