नई दिल्ली, 21 सितंबर।
दिल्ली के लोकतंत्र सेनानी और दिवंगत सेनानियों के परिवारों को मानदेय, पेंशन और सम्मान देने की मांग को लेकर लोकतंत्र सेनानी संघ ने 11 अक्टूबर को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के आवास तक शांतिपूर्ण पैदल मार्च निकालने की घोषणा की है। संघ ने दिल्ली में लोकतंत्र सेनानियों के लिए सम्मान निधि लागू करने सहित कई मांगें रखी हैं। 11 अक्टूबर को प्रस्तावित कार्यक्रम की जानकारी हालिया सार्वजनिक रिपोर्टों में भी सामने आई है।
कनॉट प्लेस स्थित होटल रेडिसन ब्लू मरीना में सोमवार को हुई पत्रकार वार्ता में संघ के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं पूर्व विधायक ओपी बब्बर, दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष राजन कुमार ढींगरा और प्रदेश महामंत्री राज कुमार सपड़ा ने मार्च की घोषणा की। संघ के अनुसार, यह मार्च लोकनायक जयप्रकाश नारायण और नानाजी देशमुख की संयुक्त जयंती के अवसर पर आयोजित किया जाएगा। इसमें करीब 2,000 लोकतंत्र सेनानी और उनके परिवारों के शामिल होने का दावा किया गया है।
ओपी बब्बर ने कहा कि आपातकाल के दौरान लोकतंत्र और नागरिक अधिकारों की रक्षा के लिए सेनानियों ने जेलों में यातनाएं सहीं। उन्होंने कहा कि कई राज्यों में लोकतंत्र सेनानियों को सम्मान और पेंशन की व्यवस्था है, लेकिन दिल्ली में ऐसी व्यवस्था नहीं है। संघ का कहना है कि वह अपनी मांगों को सरकार तक पहुंचाने के लिए शांतिपूर्ण तरीके से मार्च करेगा।
दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष राजन कुमार ढींगरा के अनुसार, आपातकाल के दौरान देशभर में करीब 1.75 लाख गिरफ्तारियां हुई थीं। संघ के आंकड़ों के मुताबिक वर्तमान में देश में करीब 20 से 25 हजार लोकतंत्र सेनानी जीवित हैं। दिल्ली में करीब 3,100 लोगों की गिरफ्तारी होने का दावा किया गया है, जिनमें करीब 700 लोगों को मीसा और अन्य को डीआईआर के तहत जेल भेजे जाने की बात कही गई है। संघ के अनुसार दिल्ली में वर्तमान में करीब 475 से 500 लोकतंत्र सेनानी जीवित हैं।
संघ ने केंद्र से पूरे देश के लिए एक समान पेंशन नीति बनाने की मांग की है। संघ के अनुसार, दिल्ली सरकार के समक्ष मांगें रखने के लिए 5 जून 2026 को दिल्ली विधानसभा के बाहर एक दिन का उपवास भी किया गया था। जून में हुए इस कार्यक्रम और मांगों की जानकारी सार्वजनिक रिपोर्टों में भी दर्ज है।
11 अक्टूबर के मार्च के लिए संघ उन राजनीतिक दलों से भी संपर्क करेगा, जिन्होंने आपातकाल के दौरान संघर्ष किया था। संघ ने कहा है कि मार्च किसी राजनीतिक दल के बैनर पर नहीं, बल्कि लोकतंत्र सेनानी संघ के बैनर तले होगा।
संघ ने पांच प्रमुख मांगें रखी हैं। इनमें दिल्ली के लोकतंत्र सेनानियों और दिवंगत सेनानियों के परिवारों को मानदेय, पेंशन और सम्मान देना, आपातकाल के इतिहास को उच्च शिक्षा के पाठ्यक्रम में शामिल करना, 25 जून को ‘संविधान हत्या दिवस’ घोषित किए जाने के संदर्भ में जिम्मेदारी तय करने के लिए उच्चस्तरीय आयोग बनाना, शाह आयोग की रिपोर्ट दिल्ली विधानसभा के पटल पर रखना और आपातकाल से जुड़े घटनाक्रम का प्रामाणिक दस्तावेजीकरण कराना शामिल है।
















