भोपाल, 21 सितंबर।
मध्य प्रदेश में दिव्यांग बच्चों की शिक्षा, प्रशिक्षण और उनके पुनर्वास कार्यों से जुड़ी संस्थाओं के वित्तीय प्रबंधन को अधिक प्रभावी बनाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया गया है। अब तक भोपाल स्तर पर केंद्रित रहने वाली भुगतान प्रक्रिया को विकेंद्रीकृत कर जिला स्तर पर ट्रांसफर कर दिया गया है। सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग द्वारा जारी नए दिशा-निर्देशों के तहत अब कलेक्टरों और स्थानीय विभागीय अधिकारियों को फंड के उपयोग व समयबद्ध भुगतान की सीधी जिम्मेदारी सौंपी गई है। इस नई व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पर्याप्त निधि होने के बावजूद जो भुगतान महीनों तक लंबित रहते थे, उन्हें रोका जा सके और संस्थाओं को जरूरत के समय पर तुरंत राशि मिल सके।
विभाग के इस प्रशासनिक सुधार के दायरे में राज्य की 20 शासकीय संस्थाएं (जिनमें 18 विद्यालय, एक प्रशिक्षण केंद्र और एक छात्रावास शामिल है) तथा 35 अनुदान प्राप्त गैर-सरकारी संस्थाएं आती हैं, जिनके माध्यम से कुल 3,410 विद्यार्थी सीधे तौर पर लाभान्वित हो रहे हैं। इन संस्थानों को कर्मचारियों के वेतन, भोजन, बिजली-पानी, स्टेशनरी और रखरखाव जैसे नियमित खर्चों के लिए पहले भोपाल की स्वीकृतियों पर निर्भर रहना पड़ता था, जिससे कई बार भुगतान महीनों अटक जाते थे। अब जिला स्तर पर ही उपलब्ध निधि और सक्षम स्वीकृति के आधार पर ई-पेमेंट व अन्य भुगतानों को त्वरित गति से निपटाया जा सकेगा, जिससे विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की देखरेख और शिक्षण व्यवस्था में कोई रुकावट नहीं आएगी।

















