जोधपुर, 22 सितंबर।
जोधपुर की एनडीपीएस मामलों की विशेष अदालत संख्या-2 के विशिष्ट न्यायाधीश मुजफ्फर चौधरी ने 13 साल पुराने अवैध मादक पदार्थ डोडा पोस्त तस्करी से जुड़े एक मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने दोषी पाए गए भंवरलाल उर्फ भंवरू (निवासी कंवरजी की खेजड़ी तापू, ओसियां) को 5 साल के कठोर कारावास और 50 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है। न्यायाधीश ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि यदि दोषी जुर्माना राशि अदा करने में विफल रहता है, तो उसे 3 महीने का अतिरिक्त कठोर कारावास भुगतना होगा।
इस मामले की पैरवी करने वाले विशिष्ट लोक अभियोजक मनोहर लाल पालीवाल ने अदालत को जानकारी दी कि यह घटना 12 नवंबर 2013 की है। ओसियां थानाधिकारी पूरण सिंह को मुखबिर के जरिए यह गोपनीय सूचना मिली थी कि भंवरलाल ने अपने घर पर अवैध रूप से डोडा पोस्त के कट्टे छुपा कर रखे हैं। इस पुख्ता सूचना के आधार पर पुलिस ने उच्च अधिकारियों को अवगत कराते हुए तुरंत बताए गए स्थान पर दबिश दी।
छापेमारी के दौरान पुलिस दल को घर के पिछले हिस्से में एक संदिग्ध व्यक्ति नजर आया, जो पुलिस को देखते ही कट्टे लेकर भागने की कोशिश करने लगा। पुलिसकर्मियों ने त्वरित कार्रवाई करते हुए घेराबंदी कर उसे दबोच लिया। पूछताछ में उसने अपनी पहचान भंवरलाल के रूप में दी और स्वीकार किया कि वह खेत और मकान का मालिक है। पास ही रखे सफेद और काले रंग के कट्टों के बारे में पूछने पर वह घबरा गया और उनमें डोडा पोस्त होने की बात कबूल की।
पुलिस ने एनडीपीएस अधिनियम के प्रावधानों के तहत मौके पर ही तौल की कार्रवाई की। इलेक्ट्रॉनिक कांटे से किए गए वजन में सफेद कट्टे से 19 किलोग्राम और काले कट्टे से 20 किलोग्राम यानी कुल 39 किलोग्राम अवैध डोडा पोस्त बरामद हुआ। जब्ती की औपचारिकताएं पूरी करने के बाद माल को मालखाने में सुरक्षित रखवाया गया और मामला दर्ज कर अनुसंधान शुरू किया गया। जांच पूरी होने के बाद आरोपी के खिलाफ अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया गया था।
मुकदमे की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने समाज में बढ़ रहे मादक पदार्थों के अपराधों की गंभीरता का हवाला देते हुए कड़े शब्दों में कड़ी सजा की मांग की, जबकि बचाव पक्ष ने अदालत से नरमी बरतने का अनुरोध किया। विशिष्ट न्यायाधीश मुजफ्फर चौधरी ने अभियोजन पक्ष की तरफ से पेश किए गए कुल 10 गवाहों, 40 दस्तावेजों और 4 आर्टिकल्स के साक्ष्यों का बारीकी से अध्ययन करने के बाद भंवरलाल को दोषी करार दिया और यह ऐतिहासिक फैसला सुनाया।
















