नई दिल्ली, 22 सितंबर।
भारतीय वायु सेना की मेजबानी में होने वाले बहुराष्ट्रीय हवाई अभ्यास ‘तरंग शक्ति’ में इस बार अमेरिका का पांचवीं पीढ़ी का एफ-35 लड़ाकू विमान भी शामिल होगा। राजस्थान के जोधपुर में 26 सितंबर से 12 अक्टूबर तक होने वाले इस अभ्यास में पहली बार अमेरिकी एफ-35 भारत में हवाई युद्धाभ्यास में हिस्सा लेगा। भारतीय वायु सेना इससे पहले विदेशों में एफ-35 के साथ कई एयर कॉम्बैट एक्सरसाइज में भाग ले चुकी है। अभ्यास में 40 से अधिक देश हिस्सा लेंगे और भारत अपने प्रमुख लड़ाकू विमानों राफेल तथा सुखोई-30 के साथ अन्य प्रमुख विमान भी तैनात करेगा।
‘तरंग शक्ति’ के दूसरे संस्करण में सात देश अपने विमानों के साथ भाग लेंगे। अमेरिका दो से तीन एफ-35 लड़ाकू विमानों के साथ, फ्रांस राफेल और संयुक्त अरब अमीरात एफ-16 के साथ अभ्यास में शामिल होगा। कई अन्य देश परिवहन विमानों के साथ हिस्सा लेंगे। इसके अलावा 32 मित्र देशों की वायु सेनाएं पर्यवेक्षक के रूप में अभ्यास का हिस्सा बनेंगी। जोधपुर एयरबेस पर यह अभ्यास भारत-जापान के ‘वीर गार्डियन’ अभ्यास के बाद होगा।
वायु सेना के वाइस चीफ ऑफ एयर स्टाफ एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित ने मंगलवार को प्रेस कांफ्रेंस में अभ्यास की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि भारतीय वायु सेना के एयरबोर्न अर्ली वार्निंग एंड कंट्रोल विमान, परिवहन विमान और हवा में ईंधन भरने वाले टैंकर भी अभ्यास में शामिल होंगे। उन्होंने कहा कि कई वर्षों तक विदेशी वायु सेनाओं के साथ ऑपरेशनल एक्सरसाइज के दौरान साझेदार देशों के साथ काम करने का अनुभव मिला। वर्ष 2024 में ‘तरंग शक्ति’ के पहले संस्करण में पहली बार कई वायु सेनाओं को एक साथ लाया गया था और अब उसी अनुभव को आगे बढ़ाया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि इस वर्ष 65 मित्र देशों को अभ्यास में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया गया है। हालांकि बदलते वैश्विक हालात और युद्ध के स्वरूप में हो रहे बदलाव के कारण रूस और इजराइल ने अभ्यास में शामिल होने पर सहमति नहीं दी है। हाल के संघर्षों ने सटीक हमलों, एकीकृत रक्षा, मानव रहित प्रणालियों, सूचना प्रभुत्व, अंतरिक्ष आधारित क्षमताओं और बहु-क्षेत्रीय अभियानों में इन क्षमताओं को एक साथ इस्तेमाल करने के महत्व को सामने रखा है। ऑपरेशन सिंदूर ने भी खुफिया आधारित अभियानों, सटीक कार्रवाई, एकीकृत वायु एवं मिसाइल रक्षा, ड्रोन रोधी प्रणालियों और विभिन्न क्षेत्रों में संयुक्त कार्रवाई के महत्व को रेखांकित किया है।
एलसीए मार्क-1ए के बारे में पूछे गए सवाल पर एयर मार्शल दीक्षित ने बताया कि शुरुआत में पर्याप्त इंजन उपलब्ध नहीं होने की समस्या थी। अब इंजन मिल चुके हैं और उन्हें विमानों में लगाया जा चुका है। वायु सेना के बेड़े में शामिल करने से पहले विमान का परीक्षण किया जा रहा है। अभी दो या तीन तकनीकी बिंदुओं का परीक्षण पूरा होना बाकी है और उम्मीद है कि एक से दो महीने में इन तकनीकी समस्याओं को दूर कर लिया जाएगा। इसके बाद विमान को वायु सेना में शामिल करने का रास्ता साफ होगा।
एफ-35 के भारत में पहली बार हवाई अभ्यास में शामिल होने के सवाल पर उन्होंने कहा कि यह अमेरिकी विमान पहले भी भारत आ चुका है। वह एयरो इंडिया में शामिल हुआ था और बाद में तिरुवनंतपुरम में फंस गया था। अब भारतीय वायु सेना इसके साथ अभ्यास करेगी। उन्होंने कहा कि अभ्यास के बाद इस बारे में अधिक जानकारी साझा की जा सकती है, हालांकि परिचालन सुरक्षा से जुड़े कुछ पहलू भी हैं।
पांचवीं या छठी पीढ़ी के लड़ाकू विमान के संबंध में उन्होंने बताया कि भारत अपना पांचवीं पीढ़ी का विमान एएमसीए विकसित कर रहा है। वायु सेना ने इस परियोजना के लिए अपनी तकनीकी क्षमता और विशेषज्ञता लगाई है।
21 नवंबर 2025 को दुबई एयर शो में तेजस मार्क-1 लड़ाकू विमान के दुर्घटनाग्रस्त होने से जुड़े सवाल पर एयर मार्शल दीक्षित ने कहा कि हादसे की जांच अभी जारी है। कुछ हिस्सों को अंतिम तकनीकी विश्लेषण के लिए लाने का प्रयास किया जा रहा है। इसके बाद ही दुर्घटना से जुड़े सवालों का स्पष्ट जवाब दिया जा सकेगा।
















