कोलकाता, 22 सितंबर।
कलकत्ता उच्च न्यायालय ने नंदीग्राम विधानसभा उपचुनाव के मैदान में उतरे कांग्रेस पार्टी के उम्मीदवार मिलन प्रधान की ओर से दायर की गई याचिका पर फिलहाल किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप करने से साफ इनकार कर दिया है। मंगलवार को इस कानूनी मामले की सुनवाई करते हुए अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए इस स्तर पर किसी भी तरह का नया निर्देश जारी करने की कोई आवश्यकता नहीं बनती है। गौरतलब है कि हल्दिया अनुमंडल अदालत ने सोमवार को ही सुनवाई के बाद मिलन प्रधान को आगामी पांच अक्टूबर तक के लिए न्यायिक हिरासत (जेल) में भेज दिया था। इसके अतिरिक्त, कांथी अदालत के अंतर्गत विचाराधीन एक अन्य मामले में भी उन्हें जेल में ही रखा गया है, जिस पर अगली सुनवाई 23 सितंबर को निर्धारित की गई है।
बता दें कि नंदीग्राम उपचुनाव के लिए चुनाव प्रचार का शोर आगामी चार अक्टूबर को थमने वाला है। ऐसे में अपने ऊपर दर्ज अन्य पांच अलग-अलग मुकदमों में भी गिरफ्तारी की तलवार लटकती देख कांग्रेस प्रत्याशी ने कानूनी सुरक्षा और संरक्षण की गुहार लगाते हुए सीधे उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था। अदालत में मिलन प्रधान की पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता अयन भट्टाचार्य ने दलील पेश करते हुए कहा कि ठीक चुनावी माहौल के बीच 18 सितंबर को उनके मुवक्किल को साल 2007 के एक बहुत पुराने मामले से जुड़े वारंट के आधार पर गिरफ्तार किया गया है। बचाव पक्ष के वकील ने लगभग 17 साल पुराने मामले में अचानक हुई इस कार्रवाई को चुनाव से ठीक पहले लोकतांत्रिक और चुनावी प्रक्रिया को बाधित करने की एक सोची-समझी साजिश करार दिया।
दूसरी तरफ, याचिकाकर्ता के इन तर्कों का कड़ा प्रतिवाद करते हुए पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से पक्ष रख रहे अतिरिक्त महाधिवक्ता राजदीप मजूमदार ने अदालत को बताया कि यह बात अपनी जगह सही है कि गिरफ्तारी का वारंट वर्ष 2007 का है, लेकिन यह पूरी कार्रवाई वर्तमान में लागू चुनाव आचार संहिता और निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों के तहत की जा रही है। उन्होंने अदालत को यह भी स्पष्ट किया कि चुनाव आयोग के नियमों के मुताबिक अकेले मिलन प्रधान ही नहीं, बल्कि विभिन्न मामलों में वांछित अन्य आरोपियों के खिलाफ भी लंबित वारंटों की तामील कराई जा रही है। राज्य सरकार की दलीलों पर गौर करते हुए अदालत ने यह भी स्वीकार कर लिया कि मिलन प्रधान के खिलाफ जिन अन्य पांच मामलों का हवाला दिया जा रहा है, उनमें भी फिलहाल कोई त्वरित हस्तक्षेप करने की जरूरत नहीं है।
















