नई दिल्ली, 23 सितंबर।
प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी ने मैकनली भारत इंजीनियरिंग कंपनी लिमिटेड (एमबीईसीएल) के अधिग्रहण से जुड़े वित्तीय मामलों में बड़ी कार्रवाई करते हुए कोलकाता, दिल्ली और बेंगलुरु समेत कुल 16 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की है। केंद्रीय जांच एजेंसी इस बात की गहराई से छानबीन कर रही है कि इस अधिग्रहण के दौरान इस्तेमाल की गई पूंजी का मूल स्रोत क्या था और धन का प्रवाह किस प्रकार हुआ, जिससे संभावित फेमा (विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम) नियमों के उल्लंघनों की परतें खोली जा सकें।
जागरूक सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, ईडी की यह तलाशी अभियान सीधे तौर पर एमबीईसीएल के अधिग्रहण प्रक्रिया में शामिल प्रमुख व्यक्तियों तथा संदिग्ध व्यावसायिक संस्थाओं के परिसरों पर केंद्रित है।
इस कार्रवाई के दायरे में संजय पासारी, राजीव पासारी, रवि टोडी और सुधीर सतनालिवाला से जुड़े ठिकाने के अलावा बीटीएल ईपीसी लिमिटेड, मंडाल व्यापार प्राइवेट लिमिटेड, ट्रोलेक्स (इंडिया) प्राइवेट लिमिटेड, सेमफिल एंटरप्राइजेज लिमिटेड और महाबलेश्वर मर्चेंट्स प्राइवेट लिमिटेड के कार्यालय व परिसर शामिल हैं।
जांच दल इस एंगल पर भी बारीकी से नजर बनाए हुए है कि कंपनी की कमान अपने हाथ में लेने के लिए प्रयोग किए गए पैसों की असलियत क्या थी और विभिन्न वित्तीय माध्यमों से किस तरह उनका लेन-देन किया गया।
एजेंसी विदेशी मुद्रा कानूनों के दायरे से जुड़े संदिग्ध लेन-देन और तमाम व्यावसायिक गतिविधियों की हर एक कड़ी को टटोलने में जुटी है।
इस पूरी जांच का एक बेहद अहम पहलू दिवाला एवं दिवालियापन संहिता (आईबीसी) 2016 की धारा 29ए के दायरे से भी जुड़ा हुआ है।
एजेंसी इस बात की तस्दीक कर रही है कि क्या कॉरपोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया (सीआईआरपी) का दुरुपयोग करके उन लोगों को परोक्ष रूप से कंपनी का मालिकाना हक या नियंत्रण वापस पाने की छूट दी गई, जो कानूनी तौर पर धारा 29ए के प्रावधानों के तहत इसके लिए पूरी तरह अयोग्य करार दिए जाते।
फिलहाल, प्रवर्तन निदेशालय की ओर से इस हाई-प्रोफाइल मामले में् तलाशी और साक्ष्य जुटाने की कार्रवाई तेजी से जारी है।
















