कोलकाता, 23 सितंबर।
तृणमूल कांग्रेस सांसद अभिषेक बनर्जी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग की है। उन्होंने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली की अदालत की निगरानी में विस्तृत जांच कराने की अपील भी की। उनकी मांग उन मीडिया रिपोर्टों के बाद सामने आई है, जिनमें चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी द्वारा मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण से जुड़े फैसलों पर आपत्ति दर्ज कराने की बात कही गई है।
रिपोर्ट के अनुसार, संधू और जोशी ने पिछले 10 महीनों में एसआईआर से जुड़े फैसलों और आदेशों पर कम से कम 14 बार औपचारिक आपत्ति दर्ज कराई थी। इनमें मतदाता पंजीकरण, नाम हटाने और बहाल करने, मतदाताओं की अपील तथा मतदाता सूची के आंकड़ों के प्रबंधन से जुड़े विषय शामिल थे। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि चार आपत्तियां एक ही दिन दर्ज की गई थीं।
इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद अभिषेक बनर्जी ने सोशल मीडिया के जरिए मुख्य चुनाव आयुक्त को तत्काल पद से हटाने और पूरे मामले की न्यायिक निगरानी में जांच कराने की मांग की। डायमंड हार्बर से सांसद ने आरोप लगाया कि यदि किसी राजनीतिक दल को लाभ पहुंचाने के लिए बड़ी संख्या में मतदाताओं को उनके मताधिकार से वंचित किया जाता है तो यह लोकतांत्रिक प्रक्रिया से जुड़ा गंभीर विषय है। उन्होंने जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय करने की मांग की।
अभिषेक बनर्जी ने कहा कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद विपक्षी दलों ने प्रधान न्यायाधीश और उच्चतम न्यायालय के अन्य न्यायाधीशों को पत्र लिखकर अपनी चिंताएं सामने रखी थीं। उनके अनुसार, इन आरोपों की पर्याप्त जांच नहीं हुई। उन्होंने उच्चतम न्यायालय से मामले में हस्तक्षेप करने और प्रधान न्यायाधीश के नेतृत्व वाली पीठ से संज्ञान लेने की अपील की।
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि दोनों चुनाव आयुक्तों ने फॉर्म छह में बदलाव, मतदाता सूची से नाम हटाने और बहाली से संबंधित प्रक्रियाओं तथा मतदाता डेटा की निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर आपत्तियां दर्ज की थीं। रिपोर्ट के अनुसार, नए मतदाताओं के लिए फॉर्म छह में किए गए कुछ बदलावों पर भी सवाल उठाए गए थे। साथ ही मतदाता सूची से जुड़ी सूचना प्रौद्योगिकी व्यवस्था के नियंत्रण में बदलाव को लेकर कैबिनेट सचिव से संपर्क किए जाने की बात कही गई है।
चुनाव आयोग ने इन रिपोर्टों के बाद अपना पक्ष रखा है। आयोग के अनुसार, तीनों चुनाव आयुक्तों के बीच अलग-अलग विषयों पर राय, टिप्पणियां और तकनीकी सुझाव होना सामान्य संस्थागत प्रक्रिया का हिस्सा है। आयोग ने कहा कि एसआईआर समेत पिछले एक वर्ष में लिए गए सभी निर्णय तीनों चुनाव आयुक्तों की मंजूरी से सर्वसम्मति से लिए गए हैं।
रिपोर्ट में सामने आई आपत्तियों को लेकर राजनीतिक विवाद के बीच एसआईआर पहले से ही मतदाता सूची से जुड़ा प्रमुख मुद्दा बना हुआ है। जून 2025 में बिहार से शुरू हुई यह प्रक्रिया कई राज्यों तक पहुंच चुकी है। पश्चिम बंगाल में भी मतदाता सूची के पुनरीक्षण को लेकर राजनीतिक दलों की ओर से लगातार सवाल उठाए जाते रहे हैं।
















