नई दिल्ली, 23 सितंबर।
सिंधु जल संधि को लेकर पाकिस्तान की ओर से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में उठाए गए मुद्दे पर भारत ने कड़ा रुख स्पष्ट किया है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि पाकिस्तान इस मामले में तथ्यों को अपने पक्ष में पेश कर रहा है। मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि भारत उस कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन को मान्यता नहीं देता, जिसके फैसले का पाकिस्तान हवाला दे रहा है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि पाकिस्तान जिस निर्णय को स्थायी मध्यस्थता न्यायालय का फैसला बता रहा है, भारत उसे स्वीकार नहीं करता। भारत के अनुसार जिस कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन का गठन इस मामले में किया गया, वह सिंधु जल संधि की शर्तों के अनुरूप नहीं है। इसी कारण भारत ने न तो इस संस्था को मान्यता दी और न ही उसकी कार्यवाही में हिस्सा लिया।
भारत का कहना है कि इस न्यायिक व्यवस्था को देश के संप्रभु निर्णयों पर अधिकार नहीं है। पाकिस्तान की ओर से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को भेजे गए पत्र के बाद विदेश मंत्रालय ने एक बार फिर इस मामले में भारत की स्थिति साफ की है।
सिंधु जल संधि से जुड़े मामले में 31 अगस्त को कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन ने अपना अवॉर्ड जारी किया था। इसमें संधि को लागू बताते हुए कहा गया था कि भारत इसे एकतरफा तरीके से स्थगित नहीं कर सकता। भारत ने इस फैसले को स्वीकार नहीं किया और कहा कि इस न्यायिक निकाय के निर्णय का उसके संप्रभु फैसलों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।
सिंधु जल संधि भारत और पाकिस्तान के बीच वर्ष 1960 में हुई थी। इसमें सिंधु नदी प्रणाली के जल के इस्तेमाल से संबंधित नियम तय किए गए हैं। दोनों देशों के बीच समय-समय पर विवाद सामने आने के बावजूद यह समझौता लंबे समय तक लागू रहा।
विदेश मंत्रालय ने पाकिस्तान को सीमा पार आतंकवाद के मुद्दे पर भी ठोस कदम उठाने की बात कही। रणधीर जायसवाल ने कहा कि पाकिस्तान को भरोसेमंद कार्रवाई के साथ स्पष्ट प्रतिबद्धता दिखानी होगी। उनके अनुसार जमीन पर उठाए गए ठोस कदमों से ही यह भरोसा बनेगा कि इस्लामाबाद अपने दावों को व्यवहार में भी साबित करेगा।
भारत ने अप्रैल 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के बाद सिंधु जल संधि को स्थगित रखने का फैसला किया था। भारत का कहना है कि जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ भरोसेमंद और ठोस कार्रवाई नहीं करता, तब तक संधि को बहाल नहीं किया जाएगा।
इस तरह सिंधु जल संधि को लेकर दोनों देशों का विवाद अब अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंच गया है। पाकिस्तान कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन के फैसले को आधार बना रहा है, वहीं भारत इस संस्था के गठन और अधिकार क्षेत्र को ही स्वीकार नहीं करता।
स्थायी मध्यस्थता न्यायालय यानी पीसीए एक अंतरराष्ट्रीय संस्था है, जो देशों, सरकारी संस्थाओं और निजी पक्षों के बीच विवादों के शांतिपूर्ण समाधान के लिए मध्यस्थता और कानूनी सहायता उपलब्ध कराती है। हालांकि भारत का रुख है कि सिंधु जल संधि से संबंधित मामले में गठित कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन संधि की शर्तों के अनुरूप नहीं है।
















