नोएडा, 28 सितंबर।
उत्तर प्रदेश के वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने कहा कि बीमा को लेकर शहरी और आर्थिक रूप से सक्षम लोगों में जागरूकता बढ़ी है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों और कमजोर वर्ग तक इसकी जानकारी पहुंचाने की जरूरत अभी भी बनी हुई है। उन्होंने कहा कि बीमारी, दुर्घटना या अन्य विपरीत परिस्थितियों में बीमा आर्थिक नुकसान को कम करने में मदद कर सकता है।
खन्ना यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो में आयोजित ‘वित्तीय समावेशन-बीमा जरूरी है’ कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने स्वास्थ्य बीमा, मोटर बीमा, दावे, सरकारी बीमा योजनाओं और वित्तीय समावेशन से जुड़े विषयों की जानकारी दी।
वित्त मंत्री ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार की कई बीमा योजनाएं संचालित हैं और लोगों को इनके बारे में जानकारी भी है। इन योजनाओं का प्रचार बढ़ने से अधिक लोग लाभ उठा सकेंगे। उन्होंने ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग तक बीमा संबंधी जानकारी पहुंचाने पर विशेष जोर दिया।
वाहनों के थर्ड पार्टी बीमा का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि इसकी जरूरत अक्सर दुर्घटना के बाद महसूस होती है। गांवों में जानकारी के अभाव या लापरवाही से कई लोग आवश्यक बीमा नहीं कराते। किसी तीसरे व्यक्ति को नुकसान होने पर ऐसी स्थिति बड़ी आर्थिक परेशानी का कारण बन सकती है।
कार्यशाला में स्वास्थ्य बीमा के दावों से जुड़े विषयों पर भी जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने बताया कि पॉलिसी की शर्तों के अनुसार कुछ मामलों में नेटवर्क या संबद्ध अस्पताल से बाहर इलाज कराने पर आवश्यक दस्तावेज और औपचारिकताएं पूरी करने के बाद प्रतिपूर्ति का दावा किया जा सकता है।
खन्ना ने कहा कि पॉलिसीधारकों को बीमा में मिलने वाली सुविधाओं और दावा प्रक्रिया की जानकारी होना जरूरी है। कई बार पूरी जानकारी नहीं होने के कारण लोग जरूरत के समय अपनी पॉलिसी का पूरा लाभ नहीं ले पाते।
प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना का उल्लेख करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि गंभीर बीमारियों के इलाज का खर्च पहले कमजोर परिवारों के लिए बड़ी चुनौती बन जाता था। कई परिवारों की जमा पूंजी खत्म होने के साथ जमीन-जायदाद बेचने या गिरवी रखने की स्थिति तक बन जाती थी।
उन्होंने कहा कि योजना से आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को राहत मिली है। पात्र परिवारों को द्वितीयक और तृतीयक स्तर के अस्पतालों में भर्ती होकर उपचार के लिए प्रति परिवार प्रति वर्ष पांच लाख रुपये तक का स्वास्थ्य कवर मिलता है।
कार्यक्रम में बताया गया कि योजना के तहत सरकारी और संबद्ध निजी अस्पतालों में कैशलेस उपचार की सुविधा उपलब्ध है। योजना में देशभर में पोर्टेबिलिटी की व्यवस्था भी है, जिससे पात्र लाभार्थी दूसरे राज्य में भी संबद्ध अस्पताल में उपचार करा सकता है।
उत्तर प्रदेश में योजना के वित्तपोषण में केंद्र और राज्य सरकार की भागीदारी है। इसमें केंद्र सरकार की 60 प्रतिशत और उत्तर प्रदेश सरकार की 40 प्रतिशत हिस्सेदारी है।
खन्ना ने कहा कि यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो में वित्तीय समावेशन और बीमा पर चर्चा का उद्देश्य योजनाओं की जानकारी देने के साथ इन्हें अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाना भी है। इसके लिए बीमा कंपनियों, एजेंटों और स्थानीय प्रतिनिधियों को मिलकर काम करने की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले, आर्थिक रूप से कमजोर और गंभीर बीमारी या दुर्घटना का खर्च उठाने में कठिनाई झेलने वाले लोगों तक बीमा की जानकारी पहुंचाने पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए। कार्यक्रम में वित्त और बीमा क्षेत्र से जुड़े अधिकारी तथा विशेषज्ञ मौजूद रहे।














