धर्मशाला, 07 अक्टूबर।
तिब्बती युवा कांग्रेस ने बुधवार को अपनी स्थापना के 56 वर्ष पूरे कर लिए। स्थापना दिवस पर संगठन ने 14वें दलाई लामा, तिब्बती बौद्ध परंपराओं के सभी महान गुरुओं और दुनियाभर में रह रहे तिब्बतियों के प्रति सम्मान और शुभकामनाएं व्यक्त कीं।
संगठन ने तिब्बती शहीदों को भी श्रद्धांजलि दी। संगठन के अनुसार इन शहीदों ने तिब्बती राष्ट्र के अस्तित्व, धर्म, भाषा और संस्कृति के संरक्षण तथा तिब्बत की स्वतंत्रता बहाल करने के लिए अपने जीवन, स्वतंत्रता और आजीविका का बलिदान दिया।
तिब्बती युवा कांग्रेस ने उम्मीद जताई कि स्वतंत्र तिब्बत का सपना जल्द पूरा होगा। संगठन ने कहा कि 14वें दलाई लामा की अपनी मातृभूमि में वापसी और स्वतंत्र एवं संप्रभु तिब्बत में तिब्बती लोगों का पुनर्मिलन भी संभव होगा।
संगठन के अनुसार इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए दृढ़ संकल्प, एकता, साहस और सामूहिक प्रयास जरूरी हैं।
तिब्बती युवा कांग्रेस की स्थापना 7 अक्टूबर 1970 को धर्मशाला में दलाई लामा की मौजूदगी में हुई थी। इसका उद्देश्य तिब्बती लोगों को एकजुट करना, देश और लोगों की सेवा करना, राष्ट्रीय एकता बनाए रखना तथा संस्कृति, धर्म और पहचान को सुरक्षित रखना था।
संगठन ने कहा कि वह 56 वर्षों से तिब्बत की पूर्ण स्वतंत्रता और संप्रभुता बहाल करने के लिए काम कर रहा है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संपर्क और समुदाय के बीच सक्रियता के जरिए तिब्बती हितों को आगे बढ़ाने का प्रयास जारी है।
संगठन के अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि चीन की कम्युनिस्ट सरकार तिब्बत में दमन और जबरन आत्मसात की नीतियां जारी रखे हुए है। उन्होंने तिब्बती भाषा, धर्म, मठ, संस्कृति और राष्ट्रीय पहचान पर हो रहे हमलों का उल्लेख किया।
स्थापना दिवस पर संगठन ने सभी तिब्बतियों से एकता, राष्ट्रीय चेतना और सामूहिक दृढ़ संकल्प मजबूत करने का आह्वान किया। साथ ही तिब्बती हितों का समर्थन करने वाले सरकारों, संगठनों और लोगों के साथ एकजुटता बढ़ाने की अपील की।













