श्रीनगर, 29 सितंबर।
जम्मू-कश्मीर विधानसभा के सत्र के दौरान मंगलवार को कांग्रेस विधायक निजाम उद्दीन भट ने शून्यकाल में मुख्य सचिव और विधि सचिव द्वारा राज्य गठन के प्रस्ताव पर भेजे गए पत्र को सदन के पटल पर चर्चा के लिए रखने की जोरदार मांग उठाई। उन्होंने इस बात पर कड़ा एतराज जताया कि आखिर किस कानूनी आधार पर जम्मू-कश्मीर की इस विधानसभा को देश के अन्य राज्यों की विधानसभाओं से अलग या कमतर आंका जा रहा है। सदन में अपने विचार रखते हुए उन्होंने सवाल किया कि संविधान के किस अनुच्छेद में यह बात दर्ज है कि यहां की विधायी संस्था अन्य राज्यों से भिन्न है, तथा अनुच्छेद 239 और जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि इनमें से कोई भी कानून विधानसभा के संप्रभु अधिकारों को सीमित करने का कोई प्रावधान नहीं करता है।
विधायक भट ने मंत्रियों के कार्यक्षेत्र पर लगाए जा रहे कथित प्रतिबंधों और अध्यक्ष की शक्तियों को चुनौती दिए जाने की प्रवृत्ति को पूरी तरह से असंवैधानिक करार दिया और इस बात पर जोर दिया कि निर्वाचित मंत्रियों को सीधे तौर पर जनता का जनादेश मिला हुआ है और वे लोकतांत्रिक रूप से जनता के प्रति ही जवाबदेह हैं। उन्होंने सदन की गरिमा और अधिकारों की रक्षा का हवाला देते हुए पुरजोर आग्रह किया कि मुख्य सचिव और विधि सचिव के उस विवादास्पद पत्र को आधिकारिक रूप से विधानसभा के रिकॉर्ड का हिस्सा बनाया जाना चाहिए, ताकि इस गंभीर विषय पर पारदर्शी तरीके से व्यापक चर्चा सुनिश्चित की जा सके।













