उत्तर बिहार, 30 सितंबर।
नेपाल के गंडक नदी बेसिन और बिहार में लगातार हो रही बारिश से गंडक नदी का जलस्तर रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गया है। इससे उत्तर बिहार में बाढ़ की स्थिति गंभीर हो गई है। कई स्थानों पर तटबंध टूटने से निचले इलाकों में पानी फैल गया है। जल संसाधन विभाग के इंजीनियर और कर्मचारी बचाव व बाढ़ नियंत्रण कार्य में लगातार जुटे हुए हैं।
पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण और गोपालगंज के निचले इलाकों में स्थिति सबसे अधिक प्रभावित हुई है। बाढ़ का पानी अब मुजफ्फरपुर, वैशाली और सारण जिलों तक भी पहुंच गया है। इन जिलों में 200 से अधिक गांव बाढ़ से प्रभावित हुए हैं।
पश्चिम चंपारण में गंडक नदी की तेज धारा के कारण चंपारण तटबंध चार स्थानों पर टूट गया है। बगहा में नदी का जलस्तर 91.25 मीटर के नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। पूर्वी चंपारण के अरेराज में गंडक के रिंग तटबंध में भी टूटने की सूचना है।
गोपालगंज के शीतलपुर-बंजरिया में गंडक नदी के बढ़ते दबाव से जमींदारी तटबंध टूट गया, जिससे कई गांवों में पानी भर गया। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए जल संसाधन विभाग ने बगहा, बेतिया, मोतिहारी और गोपालगंज में इंजीनियरों की टीमें भेजी हैं।
उधर, बागमती और कोसी नदियों का जलस्तर बढ़ने से दरभंगा, समस्तीपुर, सुपौल और सहरसा के कई गांव भी प्रभावित हुए हैं। प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव कार्य जारी है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने गंडक नदी का जलस्तर बढ़ने के बाद पश्चिम चंपारण का हवाई सर्वेक्षण कर स्थिति का जायजा लिया।
हवाई सर्वेक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने प्रशासन को राहत और बचाव कार्यों में पूरी सतर्कता बरतने तथा बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।














