कुशीनगर, 30 सितंबर।
उत्तर प्रदेश के कुशीनगर में बड़ी गंडक नदी का जलस्तर बढ़ने के बाद राहत और बचाव अभियान तेज कर दिया गया है। राहत आयुक्त डॉ. हृषिकेश भास्कर यशोद ने जिला प्रशासन को प्रभावित इलाकों में राहत कार्यों को प्राथमिकता से संचालित करने के निर्देश दिए हैं। प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के साथ भोजन, राशन और चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
राहत आयुक्त कार्यालय के अनुसार 29 सितंबर को सुबह आठ बजे बड़ी गंडक का जलस्तर 96.48 मीटर दर्ज किया गया था, जो खतरे के निशान 96 मीटर से 0.48 मीटर ऊपर था। वाल्मीकि नगर बैराज से पानी छोड़े जाने के बाद खड्डा तहसील के 18 और तमकुहीराज तहसील के 14 गांव प्रभावित हुए हैं। प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों में 10 बाढ़ चौकियां और 16 राहत शिविर सक्रिय किए हैं।
एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और पीएसी की टीमें तैनात
बचाव कार्य को मजबूत करने के लिए एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और पीएसी की बाढ़ राहत टीमें तैनात की गई हैं। प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने के लिए स्थानीय स्तर पर नावों की भी व्यवस्था की गई है। इसके अलावा स्थानीय गोताखोरों की 66 सदस्यीय टीम को भी बचाव अभियान में लगाया गया है।
16 सामुदायिक रसोइयों से भोजन की व्यवस्था
बाढ़ प्रभावित परिवारों को भोजन उपलब्ध कराने के लिए खड्डा तहसील में 13 और तमकुहीराज तहसील में तीन सामुदायिक रसोइयां संचालित की जा रही हैं। प्रशासन के अनुसार अब तक 13,030 भोजन पैकेट और 2,100 राशन किट वितरित किए जा चुके हैं।
स्वास्थ्य सेवाओं पर भी जोर
प्रभावित क्षेत्रों में चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए दो मेडिकल टीमें तैनात की गई हैं। पुलिस, स्वास्थ्य, पशुपालन और विद्युत आपूर्ति समेत संबंधित विभागों को राहत एवं बचाव कार्य में सक्रिय रखा गया है। प्रशासन बड़ी गंडक नदी के जलस्तर और बाढ़ की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है। जरूरत के अनुसार राहत अभियान का दायरा बढ़ाया जा रहा है और प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने के साथ आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है।














