कठुआ, 30 सितंबर।
जम्मू-कश्मीर विधानसभा में राज्य का पूर्ण दर्जा बहाल करने को लेकर पारित प्रस्ताव के बाद कठुआ में भाजपा कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन किया। जिला भाजपा अध्यक्ष के नेतृत्व में हुए प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने उमर अब्दुल्ला सरकार के खिलाफ नारे लगाए और मुख्यमंत्री का पुतला फूंका। विधानसभा में 28 सितंबर को पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने का प्रस्ताव पारित हुआ था। इस दौरान प्रस्ताव में स्वायत्तता और विशेष दर्जे से जुड़े पुराने संदर्भों को लेकर भाजपा विधायकों ने विरोध जताया और सदन से बाहर चले गए।
प्रदर्शन के दौरान भाजपा नेताओं ने कहा कि पार्टी जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा बहाल करने के पक्ष में है, लेकिन अनुच्छेद 370 या 2019 से पहले की विशेष संवैधानिक व्यवस्था की वापसी का विरोध करती है। भाजपा नेताओं राहुल देव, राजेश मेहता और रंजीत सिंह पठानिया ने कहा कि अनुच्छेद 370 की वापसी नहीं होनी चाहिए और जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा मिलना चाहिए। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से उचित समय पर राज्य का दर्जा बहाल करने के आश्वासन का भी उल्लेख किया।
भाजपा नेताओं ने आरोप लगाया कि विशेष दर्जे और पुरानी संवैधानिक व्यवस्था से जुड़े संदर्भ जम्मू-कश्मीर को 2019 से पहले की स्थिति की ओर ले जाने की कोशिश हैं। उन्होंने कहा कि 5 अगस्त 2019 के बाद क्षेत्र की संवैधानिक और प्रशासनिक व्यवस्था में बदलाव हुआ है और पार्टी इस बदलाव को पीछे ले जाने के किसी भी प्रयास का विरोध करेगी। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में विकास, प्रशासन और सुरक्षा से जुड़े बदलावों को आगे बढ़ाया जाना चाहिए।
वहीं, मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने विधानसभा में राज्य के दर्जे को जम्मू-कश्मीर के लोगों का अधिकार बताया है। उन्होंने कहा है कि राज्य का दर्जा बहाल करना केंद्र की ओर से किए गए वादे को पूरा करना होगा। विधानसभा में पारित प्रस्ताव को लेकर विवाद मुख्य रूप से उसमें पुराने स्वायत्तता और विशेष दर्जे से जुड़े संदर्भों पर है।














