रायपुर, 30 सितंबर।
नशे के अवैध कारोबार से जुड़े केवल आरोपितों तक सीमित रहने के बजाय पूरे वित्तीय नेटवर्क को खत्म करने के उद्देश्य से पुलिस मुख्यालय, नवा रायपुर में नारकोटिक्स मामलों की वित्तीय जांच पर एक दिवसीय राज्यस्तरीय कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें प्रदेशभर से उप पुलिस अधीक्षक से सहायक उप निरीक्षक स्तर तक के 70 पुलिस अधिकारियों ने भाग लिया।
पुलिस महानिदेशक अरुण देव गौतम के निर्देशन और अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक अमित कुमार के मार्गदर्शन में बुधवार को हुई कार्यशाला का उद्घाटन अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक, नारकोटिक्स अमित कुमार ने किया। उन्होंने कहा कि नशे के मामलों में दोषियों को सजा दिलाने के साथ अवैध तरीके से अर्जित संपत्तियों का पता लगाकर उनकी जब्ती भी जरूरी है। इससे नशे के कारोबार के वित्तीय नेटवर्क को तोड़ने में मदद मिलेगी।
उन्होंने जांच में नशे की शुरुआत से लेकर उसकी आपूर्ति और अंतिम पहुंच तक की कड़ियों को जोड़ने पर जोर दिया। उनके अनुसार आगे और पीछे की कड़ियों की पहचान करते हुए वित्तीय जांच की जाए, ताकि अवैध कारोबार से जुड़े आर्थिक नेटवर्क का पता लगाकर प्रभावी कार्रवाई की जा सके।
उप पुलिस महानिरीक्षक, नारकोटिक्स पारुल माथुर ने कहा कि मादक पदार्थों से जुड़े मामलों की जांच में विभिन्न संबंधित एजेंसियों की भूमिका महत्वपूर्ण है। अवैध कारोबार से कमाई गई संपत्तियों की पहचान कर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई करना भी जांच का अहम हिस्सा है। उन्होंने नशे की आपूर्ति में कमी, मांग में कमी, नुकसान कम करने और पुनर्वास के लिए समग्र दृष्टिकोण अपनाने की जरूरत बताई।
कार्यशाला के पहले सत्र में रायपुर आयकर जांच शाखा के उप निदेशक प्रकाश चंद्र चौहान ने प्रस्तुति दी। उन्होंने बताया कि वित्तीय जांच के जरिए नशे के अवैध कारोबार में धन के स्रोत और उसके निवेश की दिशा का पता लगाया जा सकता है।
दूसरे सत्र में रायपुर स्थित राष्ट्रीय सीमा शुल्क, अप्रत्यक्ष कर एवं नारकोटिक्स अकादमी के अतिरिक्त सहायक निदेशक सलमान इम्तियाज हुसैनी ने वस्तु एवं सेवा कर के विश्लेषण से अवैध धन और उससे जुड़े वित्तीय लेन-देन का पता लगाने के तरीकों की जानकारी दी। कार्यशाला में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अनामिका जैन सहित पुलिस मुख्यालय के अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे।














