जोधपुर, 30 सितंबर।
महर्षि दयानन्द सरस्वती स्मृति भवन में महर्षि दयानन्द सरस्वती के 29 सितंबर 1883 के क्षमादान दिवस की स्मृति में 143वां ऋषि स्मृति सम्मेलन शुरू हुआ। चार दिवसीय आयोजन की शुरुआत ध्वजारोहण और यजुर्वेद यज्ञ के साथ हुई।
सम्मेलन में नेपाल, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, गुजरात, राजस्थान सहित देश के विभिन्न हिस्सों से 500 से अधिक धर्मप्रेमी शामिल हुए। महर्षि दयानन्द सरस्वती करीब चार महीने इसी भवन में रहे थे और 29 सितंबर को यहां से प्रवास किया था। इसी स्मृति में हर वर्ष यह सम्मेलन आयोजित किया जाता है।
पहले दिन आयुर्वेद विश्वविद्यालय जोधपुर के कुलगुरु प्रोफेसर वैद्य गोविंद सहाय शुक्ल सपत्नीक मुख्य यज्ञमान बने। उन्होंने यजुर्वेद यज्ञ में मंत्रोच्चार के साथ आहुतियां दीं और यज्ञ के माध्यम से पर्यावरण शुद्धि के महत्व पर प्रकाश डाला।
प्रो. शुक्ल ने कहा कि यज्ञ से निकलने वाला धुआं पर्यावरण की शुद्धि में सहायक होता है। उन्होंने आने वाली पीढ़ी को यज्ञ और पर्यावरण संरक्षण के संस्कार देने की आवश्यकता बताई। उनके अनुसार घर में प्रतिदिन हवन करने से नई जागृति और ऊर्जा का संचार होता है।
स्मृति भवन के ट्रस्टी आचार्य वरुणदेव ने कुलगुरु प्रो. शुक्ल का उपरना, साफा और स्मृति चिह्न देकर स्वागत किया। देवेंद्र कुमार सोनी, वैद्य राजीव सोनी और डॉ. मनीष टाक भी सपत्नीक यज्ञमान बने और यजुर्वेद यज्ञ में मंत्रों के साथ आहुतियां दीं।
यज्ञशाला में आर्य प्रतिनिधि सभा राजस्थान जयपुर के प्रधान जयसिंह गहलोत, मंत्री किशनलाल गहलोत, कमल किशोर आर्य और यशपाल आर्य सहित अन्य लोग मौजूद रहे।














