सोनीपत, 30 सितंबर।
गन्नौर क्षेत्र के गांव गूमड़ की बेटी किरण पहल ने खेतों और गांव के कच्चे मैदान से शुरू हुआ अपना सफर एशियाई खेलों तक पहुंचाया है। अपनी मेहनत और तेज रफ्तार के दम पर उन्होंने एशियाई खेल 2026 में रिले स्पर्धा में स्वर्ण और मिश्रित टीम स्पर्धा में रजत पदक जीता। पदक जीतकर गांव का नाम रोशन करने वाली किरण एक अक्टूबर को गांव लौटेंगी, जहां ग्रामीण उनका स्वागत करेंगे।
किरण का खेलों से जुड़ाव तीसरी कक्षा में शुरू हुआ। उन्होंने कुछ लड़कियों को जिम्नास्टिक करते देखा और इसके बाद खेलों में रुचि बढ़ी। पांचवीं कक्षा में उन्होंने स्कूल की साइकिल दौड़, मटका दौड़, रस्सी और दौड़ प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेना शुरू किया। शुरुआती प्रतियोगिताओं में उन्हें 500 रुपये तक पुरस्कार मिले। 2010 में वह गांव से करीब दो किलोमीटर दूर बीएसटी स्कूल के मैदान तक पैदल जाकर अभ्यास करती थीं। करीब डेढ़ साल बाद परिवार ने 300 रुपये में पुरानी साइकिल खरीदकर दी। 2014 में उन्होंने सोनीपत के सुभाष स्टेडियम में प्रशिक्षण शुरू किया और बेहतर तैयारी के लिए 2015 में रोहतक चली गईं।
रोहतक में अभ्यास के साथ अपना खर्च चलाने के लिए किरण ने पतंजलि स्टोर में चार हजार रुपये मासिक वेतन पर नौकरी की। सुबह अभ्यास, दिन में नौकरी और शाम को दोबारा मैदान में प्रशिक्षण उनका नियमित कार्यक्रम था। 2018 में उन्होंने राष्ट्रीय चैंपियनशिप में लगातार दो स्वर्ण पदक जीते। दसवीं कक्षा में कंपार्टमेंट आने के कारण रेलवे की नौकरी में परेशानी हुई, लेकिन उन्होंने दोबारा पढ़ाई की और 2019 में दसवीं पास की। उसी वर्ष उन्हें पटियाला के भारतीय खेल शिविर में प्रशिक्षण के लिए बुलाया गया। कोविड के कारण 2020 में खेल गतिविधियां प्रभावित रहीं।
25 जून 2021 को किरण ने रेलवे पटियाला में कनिष्ठ लिपिक के रूप में नौकरी शुरू की। जून 2024 में 50.92 सेकंड का समय निकालकर उन्होंने पेरिस ओलंपिक के लिए सीधे क्वालीफाई किया। ओलंपिक में पदक नहीं जीत सकीं, लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनकी पहचान मजबूत हुई। एशियाई खेलों से पहले 2026 की भारतीय एथलेटिक्स श्रृंखला के सूरत, लुधियाना और संगरूर चरणों में उन्होंने स्वर्ण पदक हासिल किए।
किरण की बहन तमन्ना के अनुसार, एक राष्ट्रीय प्रतियोगिता के दौरान उनके पास करीब 22 हजार रुपये के दौड़ वाले जूते खरीदने के पैसे नहीं थे। प्रायोजक नहीं मिलने पर उन्होंने प्रशिक्षक के जूते पहनकर प्रतियोगिता में हिस्सा लिया और पदक जीता। मां माया देवी ने बताया कि सामान्य आर्थिक स्थिति के बावजूद परिवार ने किरण का हौसला बनाए रखा। 2022 में पिता की बीमारी के दौरान किरण ने अभ्यास छोड़कर उनकी देखभाल की। पिता ने उनसे ओलंपिक पदक जीतने का सपना पूरा करने को कहा था। उनके निधन के बाद यही बात किरण के लिए प्रेरणा बनी। किरण ने वीडियो कॉल पर बताया कि पदक के लिए उन्होंने काफी मेहनत की और अब उनका लक्ष्य विश्व चैंपियनशिप तथा 2028 ओलंपिक है।














