Naidunia Live
• टॉप न्यूज़ • मध्य प्रदेश • विज्ञान व प्रौद्योगिकी • अपराध • शिक्षा • संपादकीय • धर्म / अध्यात्म • वीडियो स्टोरी • मौसम • त्योहार • प्रेरक कहानियाँ
• वीडियो • न्यूज़ आर्काइव
संपादकीय
01 Oct, 2026

देश भर में कब थमेगा बेटियों पर जुल्म: हर गली में डर क्यों है

महिला सुरक्षा के लिए कानून की प्रभावी कार्रवाई के साथ परिवार, शिक्षा, पुलिस, न्याय व्यवस्था और समाज की सोच में बदलाव की जरूरत पर जोर दिया गया है।

नई दिल्ली, 1 अक्टूबर।

देश के हर कोने से छेड़छाड़, यौन उत्पीड़न और बलात्कार की घटनाएं सामने आ रही हैं और ऐसी कई घटनाओं ने एक बार फिर पूरे देश में महिला सुरक्षा के विषय को सुर्खियों में ला दिया है। जाहिर है, इस पर समाज में रोष है और लोग इससे जल्द निजात चाहते हैं। सवाल है, ऐसी घटनाएं बढ़ क्यों रही हैं? इसके पीछे कई वजहें हैं। पश्चिमी प्रभाव और समाज के पश्चिमीकरण के कारण हमारे संस्कारों और मूल्यों में गिरावट आई है। ऐसा नहीं है कि पहले ऐसी वारदातें नहीं होती थीं, लेकिन हमारे समाज की मजबूत नैतिक नींव ने काफी हद तक इन पर लगाम लगा रखी थी। गांवों में हर लड़के और लड़की को यही सिखाया और समझाया जाता था कि सभी आपस में भाई-बहन हैं। अगर कभी कोई ऐसी गलत बात सामने आती थी तो पंचायतें तुरंत सक्रिय हो जाती थीं और दोषी व्यक्ति का गांव से बहिष्कार कर दिया जाता था। आज भी माता-पिता को अपने बच्चों को सही संस्कार देने चाहिए।

आज के समय में नैतिक मूल्यों में हर तरह से गिरावट आई है। सोशल मीडिया के फायदे के साथ-साथ कुछ नुकसान भी हैं। आज किशोरों और युवाओं के हाथ में स्मार्टफोन और इंटरनेट है। ऐसी कई आपत्तिजनक सामग्री उन तक पहुंच रही है, जो उनके दिमाग पर बुरा असर डालती है। परिवार का बिखराव भी एक बड़ी वजह है। पहले संयुक्त परिवार में बुजुर्गों का साया होता था, जो बच्चों को सही-गलत सिखाते थे। अब एकल परिवार में माता-पिता दोनों काम में व्यस्त हैं। बच्चा अकेला है और इंटरनेट ही उसका साथी बन गया है। अकेलेपन और गलत सामग्री के कारण अपराध की ओर झुकाव बढ़ना स्वाभाविक है। जब तक परिवार अपने बच्चों के साथ समय नहीं बिताएगा, तब तक यह खतरा बढ़ता ही रहेगा।

कानून है, पर डर नहीं है। कई बार उन्हीं लोगों द्वारा कानून का शोषण कर दिया जाता है, जिनकी वैधानिक जिम्मेदारी उसके अधिकारों की रक्षा करना और यह सुनिश्चित करना था कि आरोपी को उचित सजा मिल सके। न्यायपालिका में भी स्थिति बेचैन करने वाली है। यौन उत्पीड़न और बलात्कार के आरोपियों को आसानी से जमानत मिल जाती है और मुकदमे लंबे खिंचते चले जाते हैं। ऐसे में आरोपी जमानत पर बाहर आने के बाद पीड़िता को डराने-धमकाने और गवाहों को तोड़ने का काम करते हैं। यौन अपराध और पीड़िता, उसके परिवार तथा उनके जीवन भर के सदमे को भुला दिया जाता है। यह याद रखने की जरूरत है कि ऐसे आरोपियों की मानसिक स्थिति को बदला नहीं जा सकता और यह मुमकिन है कि वे फिर से इस प्रवृत्ति का प्रदर्शन करें।

यह स्थिति इसलिए भी बनी हुई है कि हमारे सार्वजनिक जीवन में नैतिकता का स्तर गिरा है। कई जनप्रतिनिधि हैं, जिनके विरुद्ध ऐसे मामले लंबे समय से चल रहे हैं, लेकिन वे फिर भी सक्रिय हैं। इस माहौल में उनसे क्या उम्मीद की जा सकती है? कई बार सियासी फायदे के लिए मामलों को दबा दिया जाता है या फिर इसे राजनीतिक हथकंडे के रूप में इस्तेमाल किया जाता है, ताकि अपने हित के काम करवाए जा सकें। लड़कियों को भी कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए। उन्हें यह समझना चाहिए कि वे कहीं पर असुरक्षित हो सकती हैं, इसलिए उनके लिए आत्मरक्षा के गुर सीखना बहुत जरूरी है। हमारी संस्कृति में स्वाभिमानी महिलाओं की कमी नहीं है, इसलिए अपनी मर्यादा का ख्याल उन्हें भी रखना होगा। महिला सुरक्षा के मामले में तब तक प्रभावी असर नहीं दिखेगा, जब तक सिस्टम में ईमानदारी नहीं आएगी। हमारा समाज पूरी तरह भ्रष्टाचार की गिरफ्त में है, इसलिए जनता सड़क पर आकर भी न्याय नहीं पा रही। आखिर जिम्मेदारी किसकी है?

मुकदमों की समयबद्ध सुनवाई होनी चाहिए। बच्चियों से बलात्कार और हत्या के मामले में कठोरतम सजा अनिवार्य होनी चाहिए। किसी सभ्य समाज को शर्मसार करने वाली घटनाएं जहां समाज में भरोसे को तोड़ती हैं, वहीं कानून-व्यवस्था के प्रश्न को भी उठाती हैं। मुख्य सवाल यह है कि हमारे देश में यौन हिंसा इतनी ज्यादा क्यों है? इसका जवाब सिर्फ कानून में नहीं, बल्कि हमारे घर में है। पहला विद्यालय घर है। पिता को अपने बेटे को सिखाना होगा कि महिला सम्मान क्या है। माता को अपने बेटे को बताना होगा कि ताकत का मतलब दबाना नहीं, बल्कि बचाना है। स्कूल में यौन शिक्षा और नैतिक शिक्षा को मजबूत करना होगा। पुलिस को संवेदनशील बनाना होगा। हर थाने में महिला सहायता केंद्र सिर्फ कागजों पर नहीं, बल्कि जमीन पर काम करे।

अपराध तब रुकेगा जब समाज अपनी सोच बदलेगा। जब लड़की के कपड़ों पर सवाल उठाने की जगह लड़के की सोच पर सवाल उठेगा, जब हम अपनी बेटियों को सिर्फ बचकर चलना नहीं, बल्कि लड़कों को संभलकर चलना सिखाएंगे, जब त्वरित न्याय मिलेगा, जब फास्ट ट्रैक अदालतें सच में तेज गति से काम करेंगी, जब मीडिया सिर्फ आंकड़े नहीं, बल्कि जागरूकता फैलाएगा और जब सरकार हकीकत स्वीकार कर कठोर कार्रवाई करेगी। महिला सुरक्षा सिर्फ सरकार की जिम्मेदारी नहीं है, यह हम सबकी जिम्मेदारी है। पड़ोस की बेटी भी हमारी बेटी है। अगर हम आज चुप रहे तो कल हमारी बेटी भी असुरक्षित होगी। इसलिए बोलना होगा, लड़ना होगा और अपनी सोच बदलनी होगी। तभी यह सिलसिला थमेगा और देश सही मायने में बेटियों के लिए सुरक्षित बन पाएगा।

|
वीडियो फीचर

CM Youth Conclave 2026: भोपाल में 20 हजार युवाओं से CM मोहन यादव का संवाद, जुबिन नौटियाल ने मचाई धूम


भोपाल में वर्ग-1 शिक्षक अभ्यर्थियों का उग्र प्रदर्शन, CM हाउस घेराव की कोशिश; पुलिस ने रोका

मंडला में CM मोहन यादव का कांग्रेस पर हमला, बोले- विकास के आंकड़े सुन छाती पर लौटता है सांप #mpgovt

भोपाल में शुक्रवार रात महिलाओं का मार्च, एकजुटता का दिया संदेश #women #protest #mpnews

भोपाल में सनसनीखेज हत्या | IAS की गला रेतकर हत्या, 2 दिन पहले रखा नौकर गायब

MP BJP कोर कमेटी की बड़ी बैठक - CM मोहन यादव, संगठन पदाधिकारी रहेंगे मौजूद | BJP का बड़ा मंथन

आज का राशिफल

समाज में मान-सम्मान बढ़ेगा। आय-व्यय की स्थिति समान रहेगी। व्यापार व व्यवसाय में ध्यान देने से सफलता मिलेगी। मेल-मिलाप से काम बनाने की कोशिश सफल होगी। कामकाज में आ रहा अवरोध दूर होकर प्रगति का रास्ता मिल जाएगा। अपने काम में सुविधा मिल जाने से प्रगति होगी। शुभांक-3-5-7

आज का मौसम

भोपाल

20° / 34°

Clear

ट्रेंडिंग न्यूज़