बीकानेर, 02 अक्टूबर।
आर्ष न्यास और वैदिक शोध संस्थान के संयुक्त आयोजन में 3 और 4 अक्टूबर को बीकानेर के होटल पाणिग्रहण में दो दिवसीय राष्ट्रीय विद्वत् विचार गोष्ठी होगी। कार्यक्रम में प्रतिदिन दो सत्र आयोजित किए जाएंगे। संगोष्ठी का विषय ‘मनुस्मृति: समर्थन या विरोध कितना उचित?’ रखा गया है।
मुनि सत्यजित के अनुसार आयोजन का उद्देश्य भारतीय समाज में मनुस्मृति को लेकर बनी भ्रांतियों और अतिवादी धारणाओं को दूर करते हुए विषय पर निष्पक्ष तथा अकादमिक चर्चा करना है। उनके अनुसार मनुस्मृति को प्राचीन भारत के व्यवस्थित विधि-शास्त्र और आर्ष ग्रंथ के रूप में देखा जाता है, जिसका भारतीय संस्कृति और सामाजिक व्यवस्था में ऐतिहासिक आधार रहा है।
उन्होंने कहा कि ग्रंथ के कुछ अंशों को लेकर वर्तमान में विरोध और समर्थन दोनों तरह की धारणाएं सामने आती हैं। इन्हीं पहलुओं की वास्तविकता को समझने के उद्देश्य से संगोष्ठी में विभिन्न विषयों पर विद्वानों के बीच विचार-विमर्श किया जाएगा।
कार्यक्रम में देशभर से आए विद्वान मनुस्मृति के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और सामाजिक पक्षों पर चर्चा करेंगे। इसमें ग्रंथ में समय-समय पर प्रक्षिप्त अंश जोड़े जाने के विषय और मूल मानवतावादी तथा वेदानुकूल सिद्धांतों को समाज के सामने रखने के पहलू पर भी मंथन होगा।
विचार गोष्ठी में संपूर्ण मनुस्मृति, प्रक्षेप की उचित-अनुचित अवधारणा, वर्ण व्यवस्था, दंड व्यवस्था, विवाह व्यवस्था और स्त्रियों के अधिकार सहित विभिन्न विषयों पर पक्ष-विपक्ष में चर्चा होगी।
आयोजन से जुड़े रविंद्र भटनागर ने बताया कि संगोष्ठी में डॉ. सुरेंद्र कुमार, आचार्य रविंद्र, डॉ. सुधीर आर्य, आचार्य शीतल, डॉ. शिवलोचन शाण्डिल्य, आचार्य हरिप्रसाद, आचार्य रविशंकर, डॉ. दीपक आर्य, उत्कर्ष आर्य, आर्यन आचार्य, प्रो. शत्रुंजय रावत, डॉ. नंदिता सिंघवी, केसरमल और डॉ. चंचल पाठक सहित कई विद्वान व्याख्यान देंगे।
कार्यक्रम में यज्ञ प्रवचन, परिचर्चा और रात्रि सत्संग भी होंगे। आयोजन पर्यावरण पोषण यज्ञ समिति, बीकानेर के सौजन्य से किया जाएगा। आयोजकों ने बीकानेर के गणमान्य नागरिकों, धर्मप्रेमियों और विषय में रुचि रखने वाले लोगों से अधिक संख्या में पहुंचकर विचार गोष्ठी का लाभ लेने का आग्रह किया है।














