भोपाल, 2 अक्टूबर।
राजधानी भोपाल में बीते 24 घंटे में सात थानों में साइबर फ्रॉड के 14 मामले दर्ज हुए हैं। कहीं बिजली बिल तो कहीं यातायात चालान के नाम पर आम आदमी को लूटा जा रहा है। शिकायतें दर्ज हो रही हैं, लेकिन पैसा वापस आने की उम्मीद लगभग खत्म हो चुकी है। यह स्थिति सिर्फ भोपाल की नहीं, पूरे देश की है। सवाल है कि आम आदमी कब सचेत होगा और सिस्टम कब जागेगा।
ठगों ने आम आदमी के मनोविज्ञान को समझ लिया है। भारतीय नागरिक बिजली कटने और पुलिस चालान से डरता है। इसी डर को हथियार बनाया जा रहा है। मैसेज आता है कि बिजली बिल अपडेट नहीं है, आज रात कनेक्शन कट जाएगा, लिंक पर क्लिक करके बिल जमा करें। दूसरा मैसेज आता है कि गाड़ी का चालान पेंडिंग है। लोग घबरा कर लिंक पर क्लिक करते हैं। फिर एपीके फाइल डाउनलोड होती है और देखते ही देखते खाता खाली हो जाता है।
पुलिस प्रशासन इस पूरे खेल में असहाय नजर आ रहा है। पैसा कहां गया, यह पता लगाना मुश्किल होता है। पैसा एक खाते से दूसरे और फिर तीसरे खाते में पहुंचकर क्रिप्टो या एटीएम से निकल जाता है। जब तक पुलिस एक खाते को फ्रीज करती है, पैसा कहीं और जा चुका होता है। हमारे पास कानून है, लेकिन तकनीक नहीं है। हर जिले में साइबर थाने का बोर्ड लगा है, लेकिन अंदर वही पुराने संसाधन हैं।
सरकार जागरूकता अभियान चला रही है। फिर भी लोग ठगी का शिकार हो रहे हैं। कारण है कि जागरूकता सिर्फ सूचना नहीं, व्यवहार परिवर्तन है। हम अनजान लिंक पर क्लिक न करने की सलाह देते हैं, लेकिन यह नहीं बताते कि असली बिजली कंपनी का मैसेज कैसा होता है और नकली कैसा। यह भी नहीं सिखाते कि सरकारी भुगतान सिर्फ आधिकारिक एप या वेबसाइट से ही करना है।
क्या बिजली कंपनियों की जिम्मेदारी नहीं कि वे ग्राहकों को बताएं कि वे व्यक्तिगत लिंक नहीं भेजते? क्या परिवहन विभाग की जिम्मेदारी नहीं कि चालान का मैसेज सिर्फ सरकारी नंबर से भेजे? क्या टेलीकॉम कंपनियों की जिम्मेदारी नहीं कि वे फर्जी सिम बंद करें? हर विभाग अपनी जिम्मेदारी दूसरे पर डाल रहा है और आम आदमी पिस रहा है। जब तक केंद्र, राज्य और निजी कंपनियां साझा सुरक्षा तंत्र नहीं बनाएंगी, यह लूट चलती रहेगी।
जब तक पुलिस कार्रवाई करती है, पैसा दूसरे खातों में पहुंच जाता है। इसलिए सतर्कता ही बचाव है। भुगतान से पहले संदेश की सत्यता जांचना जरूरी है और आधिकारिक माध्यम का उपयोग करना चाहिए। कोई भी सरकारी विभाग व्हाट्सएप पर एपीके फाइल नहीं भेजता। कोई कंपनी यह नहीं कहती कि तुरंत पैसा नहीं दिया तो बिजली कट जाएगी। लालच और डर दोनों पर काबू पाना होगा। आधिकारिक वेबसाइट पर जांचें और किसी भी अनजान लिंक को फोन में जगह न दें। डिजिटल दुनिया में आपका अंगूठा ही आपकी तिजोरी की चाबी है। गलत जगह क्लिक किया तो ताला टूट जाएगा। सतर्क रहें और याद रखें कि साइबर सुरक्षा कोई सरकारी योजना नहीं, बल्कि आपकी अपनी आदत है।













