भोपाल, 05 अक्टूबर।
भोपाल में मास्टर प्लान दो हजार सैंतालीस आ रहा है। नाम सुनते ही ऐसा लगता है जैसे शहर अब पेरिस बन जाएगा, लेकिन ड्राफ्ट पढ़िए तो पता चलता है कि यह पेरिस नहीं, पूरी कॉलोनी को करोल बाग बनाने की तैयारी है। नियम कहता है कि कॉलोनी में सिर्फ पांच प्रतिशत व्यावसायिक गतिविधियां होंगी। हकीकत में अरेरा से लेकर शाहपुरा तक हर घर में शोरूम खुला है। पांच प्रतिशत की आड़ में पूरे पचास प्रतिशत पर कब्जा है और अब उसी कब्जे को पेड पार्किंग का सुंदर नाम दिया जा रहा है।
नई योजना कहती है कि दो सौ से ज्यादा कॉलोनियों में रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन पेड पार्किंग चलाएंगे। मतलब जो रहवासी अब तक दुकानों का विरोध कर रहे थे, अब वही पार्किंग के पैसे गिनेंगे। घर के सामने दुकान और फिर उसी दुकान के सामने अपनी ही गाड़ी का पार्किंग शुल्क। यह सुविधा है या वसूली का नया तरीका? नगर निगम कहता है कि शहर में बीस लाख गाड़ियां हैं और बत्तीस जगह पेड पार्किंग है। अब कॉलोनी की गलियों को ही पार्किंग बना दो तो नगर निगम का टेंशन खत्म, जनता का टेंशन शुरू।
ड्राफ्ट में बड़े प्यार से लिखा है कि बारह मीटर से कम सड़क पर डॉक्टर और वकील बैठेंगे, अठारह मीटर पर बैंक और डे केयर सेंटर और चौबीस मीटर पर होटल और कोचिंग। धन्य है सोचने वाले! जिस गली में दो स्कूटर एक साथ नहीं निकलते, वहां होटल और कोचिंग खोलने का आइडिया सिर्फ मास्टर प्लान में ही आ सकता है। भविष्य में बच्चा स्कूल नहीं जाएगा, गली में ही कोचिंग में घुस जाएगा और बीमार होगा तो पड़ोसी के ड्राइंग रूम में बने नर्सिंग होम में भर्ती हो जाएगा। सब कुछ घर बैठे।
सरकार कहती है कि यह मास्टर प्लान जनता की सुविधा के लिए है, लेकिन सुविधा किसकी? दुकानदार की, जो घर को दुकान बनाकर बैठा है या रहवासी की, जो शाम को अपने ही घर में घुसने के लिए जाम में फंसा है? असली खेल निवेश का है। अर्बन ग्रोथ कांक्लेव होना है, निजी निवेश लाना है, तो निवेशक को दिखाना पड़ेगा कि देखो, हमने हर घर को दुकान बना दिया है, आओ और खरीद लो।
मास्टर प्लान का मतलब शहर को सांस देना होता है, न कि हर गली का गला घोंटना। यदि पांच प्रतिशत के नाम पर पूरी कॉलोनी को बाजार बना दिया तो कल को कोई अपने घर में सुकून से सो भी नहीं पाएगा। हॉर्न की आवाज और ग्राहकों की भीड़ में रहवासी संघ सिर्फ पार्किंग की पर्ची काटता रह जाएगा। सरकार को सोचना होगा कि क्या वह शहर बसा रही है या शहर को बेच रही है। वरना जनता पूछेगी, यह मास्टर प्लान है या मास्टर जाम?













