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संपादकीय
05 Oct, 2026

मुस्कुराइए, कैमरे में अब चेहरा ही बनेगा राशन कार्ड, अंगूठे की लकीरों से चेहरे की चमक तक का सफर

आधार आधारित सेवाओं में फेस ऑथेंटिकेशन के विस्तार से राशन और कल्याणकारी योजनाओं के सत्यापन को आसान बनाने की तैयारी है, हालांकि डेटा सुरक्षा और तकनीकी चुनौतियां भी सामने हैं।

नई दिल्ली, 05 अक्टूबर।

भारत में पहचान का मतलब अब तक अंगूठा था। अंगूठा लगा और राशन मिला, अंगूठा लगा और पेंशन आई। लेकिन अंगूठा कई बार धोखा दे जाता था। मजदूर के हाथ में मिट्टी, बुजुर्ग की उंगलियों में झुर्रियां और मशीन में नेटवर्क की कमी के कारण हकदार को भी भीख मांगनी पड़ती थी। अब सरकार ने इस पुरानी परेशानी का नया हल निकाला है। चेहरा ही पहचान है। नया सिस्टम कहता है कि अब आधार का सत्यापन फेस ऑथेंटिकेशन से होगा। यानी चेहरा दिखाओ और काम कराओ। यह बदलाव सिर्फ तकनीक का नहीं, बल्कि भरोसे का भी है।

ईपीडीएस यानी इलेक्ट्रॉनिक पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम में सबसे बड़ा बदलाव फेस रिकॉग्निशन है। पहले फिंगरप्रिंट या आइरिस से राशन मिलता था, अब चेहरे को भी जोड़ा गया है। इससे फर्जी राशन कार्ड और डुप्लीकेट लाभार्थियों पर लगाम लगेगी। देश में मुफ्त और रियायती राशन वितरण में होने वाली धांधली पर अंकुश लगेगा। कई बार स्कैनिंग में तकनीकी दिक्कतों के कारण जरूरतमंदों को खाली hand लौटना पड़ता था। अब चेहरे के जरिए सटीक सत्यापन हो सकेगा। सबसे बड़ी बात यह है कि आधार को अब तेईस आधिकारिक भाषाओं से जोड़ा जा रहा है, ताकि गांव का आदमी भी अपनी भाषा में इसे समझ सके।

पोर्टल सरकारी और अर्धसरकारी विभागों को आधार से जुड़ी अनुमति के लिए अब लंबी फाइल नहीं चलानी पड़ेगी। एसडब्ल्यूआईके पोर्टल 2.0 लॉन्च किया गया है। इसके जरिए केंद्र और राज्य की कल्याणकारी योजनाओं के लिए सत्यापन तेज, पारदर्शी और एक ही खिड़की से होगा। पहले एक योजना में आधार जोड़ने में महीनों लगते थे, अब क्लिक में काम होगा। इससे योजनाओं का लाभ तेजी से लोगों तक पहुंचेगा और बाबूगिरी कम होगी।

वेबसाइट और मोबाइल ऐप का भी नया अवतार सामने आया है। पुरानी वेबसाइट भारी थी और समझना मुश्किल था। नई वेबसाइट में एआई का उपयोग किया गया है। दिव्यांगों के लिए स्क्रीन रीडर, कीबोर्ड नेविगेशन और फॉन्ट बड़ा या छोटा करने जैसी सुविधाएं जोड़ी गई हैं। अब बुजुर्ग भी घर बैठे अपनी जानकारी अपडेट कर सकेंगे। पहले आधार केंद्र के चक्कर लगाने पड़ते थे, अब मोबाइल ही आधार केंद्र बन जाएगा।

नया ऑथेंटिकेशन फ्रेमवर्क सरकारी और निजी कंपनियों के बीच आधार के उपयोग को व्यवस्थित करेगा। प्रमाणीकरण बेहतर होगा, लेकिन निजता भी बचेगी। चेहरे की फोटो को स्टोर नहीं किया जाएगा, बल्कि उसे एक टोकन में बदला जाएगा। टोकन सिस्टम का मतलब है कि आपका चेहरा कहीं सेव नहीं होगा, बस एक कोड बनेगा, जो सत्यापन के बाद खत्म हो जाएगा। इससे किसी के चेहरे का गलत इस्तेमाल नहीं हो सकेगा और डेटा लीक का डर कम होगा।

प्राधिकरण के क्षेत्रीय कार्यालयों में भीड़ लगती है। लोग सुबह से लाइन में खड़े रहते हैं। अब टोकन मैनेजमेंट सिस्टम से काम होगा। विजिटर वेरिफिकेशन आसान होगा और काम की मॉनिटरिंग होगी। इससे समय बचेगा और दलाली खत्म होगी। पहले लोग पूछते थे कि नंबर कब आएगा, अब सिस्टम खुद बताएगा।

तकनीक आकर्षक है, पर सवाल भी उतने ही बड़े हैं। चेहरा अंगूठे की तरह स्थिर नहीं है। उम्र के साथ बदलता है। दाढ़ी, मूंछ, चश्मा, घूंघट और बीमारी से चेहरा बदल जाता है। क्या सिस्टम हर बार पहचान पाएगा? गांव में जहां नेटवर्क नहीं, बिजली नहीं और कैमरे की क्वालिटी खराब है, वहां चेहरा पहचानना कितना आसान होगा? राशन दुकानदार को नया फोन मिलेगा या पुरानी मशीन से ही काम चलाना पड़ेगा? बुजुर्ग महिला जो घूंघट में रहती है, उसका सत्यापन कैसे होगा? यदि इन सवालों का जवाब नहीं खोजा गया तो यह योजना शहरों के मॉल तक सिमट जाएगी और गांव का गरीब फिर से तकनीक और भूख के बीच फंसा रहेगा।

अंगूठे का डेटा लीक हो जाए तो भी खतरा है, लेकिन चेहरे का डेटा लीक होना और खतरनाक है। पासवर्ड बदला जा सकता है, चेहरा नहीं बदला जा सकता। आधार में पहले ही निजता को लेकर लोगों में डर था। अब चेहरे की पहचान से यह डर और गहरा होगा। सरकार को यह सुनिश्चित करना होगा कि फेस टेम्पलेट किसी निजी कंपनी के सर्वर पर न जाए और उसका उपयोग सिर्फ सत्यापन तक ही सीमित रहे। हर सत्यापन के बाद नागरिक को संदेश आना चाहिए कि उसके आधार का उपयोग कहां हुआ।

चेहरे से होगी पहचान, आधार से जुड़े काम होंगे आसान। यह नारा सुनने में बहुत मीठा है, लेकिन इसे जमीन पर उतारने के लिए सिर्फ सॉफ्टवेयर अपडेट काफी नहीं है। ट्रेनिंग, नेटवर्क, सुरक्षा और जागरूकता, चारों की जरूरत है। नागरिक को विकल्प मिलना चाहिए। अंगूठा, चेहरा और ओटीपी, तीनों में से कोई एक चुनने की आजादी होनी चाहिए। अंतिम लक्ष्य यही होना चाहिए कि तकनीक नागरिक के लिए हो, नागरिक तकनीक के लिए नहीं। यदि यह संतुलन बन गया तो राशन से लेकर पेंशन तक हर सेवा में लीकेज बंद होगा और हकदार को उसका हक बिना किसी बिचौलिए के मिलेगा। यही डिजिटल गवर्नेंस का असली चेहरा है।

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